भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज डार्क वेब पर लीक होने का दावा किया गया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक हैकर समूह ने परियोजना से संबंधित संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक करने का दावा किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लीक दस्तावेजों में परियोजना के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की सूची, कंट्रोल रूम से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। दावा है कि मई 2026 में सर्वर से समझौता किया गया और जून में डेटा लीक की बात सामने आई, जबकि मामले की जानकारी अब सार्वजनिक हुई है।
परियोजना की यूनिट-3 और यूनिट-4 पर काम कर रही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने पुष्टि की है कि उसके एक थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता योट्टा के सर्वर पर साइबर हमला हुआ था। कंपनी का कहना है कि घटना की सूचना संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, हैकर समूह ने करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर अपलोड करने का दावा किया है। इनमें कथित तौर पर इंजीनियरिंग ब्लूप्रिंट, निरीक्षण रिकॉर्ड, सप्लाई चेन से जुड़े दस्तावेज और बैठकों के रिकॉर्ड शामिल हैं।
न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने कहा है कि वह रिलायंस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मामले की समीक्षा कर रहा है। वहीं भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) भी इस कथित डेटा लीक की जांच में जुटी है।
साइबर सुरक्षा और परमाणु सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लीक हुए दस्तावेज वास्तविक हैं, तो उनसे किसी हमलावर को परियोजना की सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है, जिससे भविष्य में सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि संयंत्र के परिचालन या परमाणु सुरक्षा प्रणालियों पर किसी तरह का असर पड़ा है या नहीं।
यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम परियोजना साइबर सुरक्षा से जुड़ी खबरों में आई हो। वर्ष 2019 में भी संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क में मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय अधिकारियों ने कहा था कि परिचालन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित रही और परमाणु संयंत्र का संचालन प्रभावित नहीं हुआ था।
यह मामला एक बार फिर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा और थर्ड-पार्टी सेवा प्रदाताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

