जयपुर:-कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पाकिस्तान से तनाव और सीजफायर के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा युद्ध विराम की घोषणा से पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। डोटासरा ने कहा, “हमारी सेना ने वीरता का परिचय देते हुए पाकिस्तान के घुटने टिका दिए थे, लेकिन इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर युद्ध विराम का ऐलान किया, और इसके बाद केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार किया।”
उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि केंद्र सरकार को अमेरिका से मध्यस्थता क्यों करवानी पड़ी? डोटासरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वह इस मुद्दे पर स्पष्टता देने के लिए एक सर्वदलीय बैठक और संसद का विशेष सत्र बुलाकर स्थिति को साफ करें। डोटासरा ने इस पर भी सवाल उठाया कि कश्मीर मामले को लेकर अमेरिका की मध्यस्थता को क्यों स्वीकार किया गया, जो हर भारतीय के लिए पीड़ादायक है।
डोटासरा ने यह भी कहा कि जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे, तब वह पाकिस्तान से युद्ध की बात करते थे, लेकिन अब वह इस मुद्दे पर चुप हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों, जैसे गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पर भी सवाल उठाया, जो पहले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत में शामिल करने की बात करते थे, लेकिन अब इस पर कुछ नहीं बोल रहे।
सर्वदलीय बैठक में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को न बुलाए जाने पर भी उठाए सवाल
डोटासरा ने शनिवार को जयपुर में आयोजित सर्वदलीय बैठक में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को न बुलाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह बैठक पूरी तरह से ब्यूरोक्रेट्स द्वारा नियंत्रित की जा रही थी, जो नहीं चाहते कि सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्ष बैठक में शामिल हों।
“मुझे कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते नहीं बुलाया गया, यह तो समझ में आता है, लेकिन भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष को भी नहीं बुलाया गया, जबकि वह दिल्ली से विशेष रूप से आए थे,” डोटासरा ने कहा।
कांग्रेस पृष्ठभूमि के कर्मचारियों को बॉर्डर पर भेजने पर भी उठाए सवाल
डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों को बॉर्डर वाले क्षेत्रों में भेज रही है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी, जो महीनों से एपीओ पर थे, अब अचानक बॉर्डर पर तैनात किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पृष्ठभूमि के कर्मचारी बॉर्डर पर जाने से नहीं डरते, लेकिन इस प्रक्रिया में सरकार भेदभाव कर रही है।
वाजपेयी और इंदिरा गांधी के दृष्टिकोण का हवाला दिया
डोटासरा ने 1999 के कारगिल युद्ध और 1971 के भारत-पाक युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी विदेश नीति का पालन किया था। “वाजपेयी ने अमेरिकी दबाव के बावजूद कारगिल युद्ध में किसी की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की थी, और इंदिरा गांधी ने 1971 में अमेरिका को आंख दिखाते हुए पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे,” डोटासरा ने कहा।
प्रधानमंत्री से अपील: अमेरिका के दबाव का कारण बताएं
डोटासरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि जैसे उन्होंने नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मामलों में देश को संबोधित किया था, वैसे ही अब उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि अमेरिका के दबाव में क्यों आकर सीजफायर की बात मानी गई।
पड़ोसी देशों के साथ बढ़ते तनाव पर चिंता जताई
डोटासरा ने कहा कि आज भारत के सभी पड़ोसी देश हमारे खिलाफ खड़े हैं। चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा हो गया है, और बांग्लादेश समेत कई अन्य देशों ने भी भारत का समर्थन नहीं किया है। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि विदेश नीति को लेकर सरकार का क्या दृष्टिकोण है, खासकर जब हमारे पड़ोसी देशों के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है।

