टी.आर. सैनी
नैनवां 22 जून।श्री खरदरेश्वर महादेव त्रिवेणी संगम पर रामेश्वर पीठाधीश्वर बाबा बालकदास जी महाराज के सानिध्य में आयोजित 21 कुण्डात्मक श्री रुद्र महायज्ञ, दिव्य संत प्रवचन एवं शिखर कलश प्रतिष्ठा महोत्सव के सातवें दिन आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रभावना और सनातन संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। दिनभर यज्ञ, रुद्राभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान एवं रामलीला मंचन के बीच सायंकाल आयोजित संत प्रवचन कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए चित्रकूट धाम के कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि नेताओं का काम मत लेना होता है, जबकि संतों का कार्य समाज में व्याप्त मतभेदों को समाप्त कर प्रेम, समभाव और एकता स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का परिवार विविधताओं में एकता, सहअस्तित्व और समरसता का जीवंत संदेश देता है।
स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि रुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में फैले वैमनस्य को समाप्त कर आत्मीयता और सद्भाव का वातावरण निर्मित करने का सशक्त माध्यम है। यज्ञ वेदिका पर समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा यज्ञ से व्यक्ति, समाज और प्रकृति तीनों का कल्याण होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय परमात्मा की भक्ति एवं ध्यान में स्वयं को समर्पित करने की आवश्यकता है। भगवान भाव के भूखे होते हैं और सच्चे मन से की गई आराधना कभी निष्फल नहीं जाती। यज्ञनारायण भगवान की कृपा से जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और प्रसन्नता का संचार होता है।
जगद्गुरु ने रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका नियमित अध्ययन चरित्र निर्माण, संस्कार संवर्धन और जीवन मूल्यों की स्थापना का सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने श्रद्धालुओं से रामनाम को जीवन का आधार बनाने तथा धर्म एवं संस्कृति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
धर्मसभा में महामंडलेश्वर शिवशरण दास महाराज, टाटम्बरी बाबा, सुखदेव दास महाराज, सच्चिदानंद गिरी महाराज एवं महंत राघव दास महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन महंत दशरथ दास महाराज ने किया।
इससे पूर्व यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य रुद्राभिषेक, हवन एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुण्डों में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि एवं पर्यावरण शुद्धि की कामना की। वहीं रामलीला मंचन और भजन संकीर्तन ने देर रात तक श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर रखा।
गोठड़ा, सरसोद, ब्राह्मणों का लुहारिया सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ महायज्ञ को जनआस्था के विराट उत्सव का स्वरूप प्रदान कर रही है।

