‘इंतजारशास्त्र’ पर गहलोत का तंज,बोले— आईपीडी टावर में देरी मरीजों के जीवन से समझौता

Rajasthan

जयपुर, 24 मार्च 2026।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘इंतजारशास्त्र’ के दूसरे अध्याय के तहत जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन आईपीडी टावर की धीमी प्रगति को लेकर राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि लाखों मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है, जिसे अनावश्यक देरी की भेंट चढ़ाया जा रहा है।

गहलोत ने कहा कि वर्ष 2022 में शुरू किया गया 1200 बेड का अत्याधुनिक आईपीडी टावर, SMS अस्पताल पर बढ़ते रोगी भार को कम करने और राजस्थान को एक विश्वस्तरीय मेडिकल हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। लेकिन दुर्भाग्यवश, वर्तमान सरकार की उदासीनता के कारण यह परियोजना आज ठहराव का शिकार है।

उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित समय-सीमा पार हो जाने के बावजूद 24 मंजिला इस टावर में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में एक भी नई मंजिल का निर्माण नहीं हो पाया, जो कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी और प्राथमिकताओं के अभाव को दर्शाता है।

गहलोत ने कहा कि देरी का खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है। अस्पतालों में पहले से ही भीड़ और संसाधनों की कमी के बीच यह प्रोजेक्ट राहत देने वाला था, लेकिन अब मरीजों को इलाज के लिए और अधिक इंतजार करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि परियोजना की लागत लगभग 400 करोड़ रुपये से बढ़कर 764 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जो कि सरकारी लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली का सीधा परिणाम है। उन्होंने सवाल उठाया,
“जब लागत दोगुनी हो रही है और काम ठप पड़ा है, तो आखिर इस देरी और बढ़े हुए खर्च की जिम्मेदारी कौन लेगा?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी प्रश्न किया कि
“क्या केवल इसलिए इस जनहितकारी परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है क्योंकि इसकी शुरुआत कांग्रेस सरकार ने की थी?”

उन्होंने कहा कि ‘निरोगी राजस्थान’ का सपना केवल नारों से पूरा नहीं होगा, बल्कि समयबद्ध और प्रतिबद्ध कार्य से ही साकार होगा। सरकार को चाहिए कि वह राजनीतिक पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण परियोजना को प्राथमिकता दे और शीघ्र पूर्ण करवाए।

अंत में गहलोत ने कहा कि
“इंतजारशास्त्र की यह नीति प्रदेश की जनता पर भारी पड़ रही है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की देरी न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि अमानवीय भी है।”