जयपुर। 27 मई, 2026। देश के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ज़ोर देकर कहा कि यदि आज देश को बचाना है, तो पंडित नेहरू की विदेश नीति को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि आज़ादी की जंग के अंदर जो पंडित नेहरू की भूमिका रही, करीब नौ-दस साल तक वो जेलों में बंद रहे, लंबा संघर्ष किया गांधी जी के सान्निध्य में, वह लंबी कहानी देशवासियों को मालूम है। गहलोत ने आगे कहा कि नेहरू जी ने जो आधारभूत ढांचा देश में तैयार किया, उसी पर आज देश टिका हुआ
नेहरू जी की विदेश नीति की सर्वमान्यता :
देश के प्रधानमंत्रियों के इतिहास का ज़िक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि नेहरू जी की जो विदेश नीति थी, उसको किसी ने प्रधानमंत्री या सरकार ने डिस्टर्ब नहीं किया। चाहे वो पंडित नेहरू के विचारों से मिलते या नहीं मिलते हों।
उन्होंने अटलबिहारी वाजपेयी के विदेश मंत्री कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि “मुझे याद है एक बार वाजपेयी जी विदेश मंत्री बने थे, मोरारजी देसाई के वक्त में, तब भी उन्होंने कहा था कि विदेश नीति पंडित नेहरू की ही चलेगी देश के अंदर, वो ज़माना हमने देखा है।”
वर्तमान विदेश नीति पर गहरी चिंता :
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि आज हम क्या देखते हैं? हमारी विदेश नीति की जो हालत हुई है, उसके कारण से पूरा देश चिंतित है। विदेश नीति ऐसी हो गई है कि कोई मुल्क आपके साथ ही खड़ा नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर हुआ, दुनिया का एक मुल्क भारत के साथ आ के खड़ा नहीं हुआ जबकि पाकिस्तान के साथ में चाइना भी था, टर्की भी था।
उन्होंने कहा कि रशिया के साथ भी अब पहली वाली बात नहीं रही। पूर्व मुख्यमंत्री ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि इंदिरा जी के वक्त में ये सातवां बेड़ा जो है अमेरिका का, जो अब ईरान में जा रहा है, उससे बड़ा बेड़ा भारत के खिलाफ भेज दिया गया था जब बांग्लादेश की आज़ादी का युद्ध चल रहा था ,लेकिन इंदिरा गांधी ने अमेरिका की परवाह नहीं करी। आज स्थिति यह है कि अमेरिका कहता है कि आप तेल रशिया से नहीं खरीदो।
वैश्विक स्तर पर देश की साख का सवाल :
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति पर बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी पर टीका टिपण्णी करते हैं कभी कहते हैं कि वो दोस्त हैं मेरे, कभी कहते हैं मैं उनका पॉलिटिकल कैरियर खत्म कर सकता हूँ, कभीभारत के बारे में वो बहुत ही निम्न बातें करते हैं, हमारे देश के बारे में, और हम चुप हैं। उन्होंने कहा कि ये हमारी विदेश नीति के हालात हैं।
गहलोत ने स्पष्ट कहा कि अगर देश को बचाना है तो प्रधानमंत्री मोदी को जो पंडित नेहरू की विदेश नीति थी, उस पर वापस देश को लाना चाहिए।
वैश्विक बदलाव और नेहरू नीति की प्रासंगिकता :
विदेश नीति के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि देश की आर्थिक नीति हो चाहे सामाजिक नीति या राजनीतिक स्थिति भी तमाम बातें विदेश नीति पर डिपेंड करती हैं क्योंकि दुनिया अब ग्लोबल वर्ल्ड हो गया है, इंटरनेट की सेवाएं हैं, पूरी दुनिया से हम जुड़ चुके हैं। पहले वाली बात नहीं रही कि अमेरिका में क्या हो रहा है तो हमें मालूम नहीं पड़ता था। अब तो हर चीज़ का दुनिया के सब मुल्कों के अंदर इंटरनेट के माध्यम से सब पहुँचता है कि कौन क्या मुल्क में क्या घटनाएँ, दुर्घटनाएँ हुई हैं।
गहलोत ने ज़ोर देकर कहा कि इसलिए हमारी विदेश नीति का जो महत्व है, वो प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार को समझना चाहिए और विदेश नीति वापस जो पंडित नेहरू की है, उस पर वापस लाना चाहिए ,तब तो ये देश आगे बढ़ पाएगा, वरना ये विश्व गुरु बनने की बात, या देश को विश्व गुरु बनाने की बात ये सब खाली कागजों में धरी रह जाएगी।

