जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में भारत ने न केवल अपनी अध्यक्षता के दौरान तय हुए मुख्य वैश्विक एजेंडे को दोहराया, बल्कि वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को भी प्रमुखता से उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की दो अहम सत्रों को संबोधित करते हुए समावेशी और सतत विकास, जलवायु वित्त, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास, आपदा-रोधी ढांचे और तकनीकी सहयोग पर भारत की दृष्टि प्रस्तुत की।
दक्षिण अफ़्रीका की अध्यक्षता में स्किल्ड माइग्रेशन, पर्यटन, खाद्य सुरक्षा, एआई, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार और महिला सशक्तीकरण जैसे मुद्दों पर हुई प्रगति की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “अब विकास के नए पैरामीटर्स पर विचार करने का समय है।” उन्होंने भारत के ‘इंटीग्रल ह्यूमनिज़्म’ के सिद्धांत को दुनिया के सामने एक ऐसे विकल्प की तरह रखा जो मनुष्य, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन बनाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने छह महत्वपूर्ण वैश्विक पहलों का प्रस्ताव दिया—
- G20 ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉजिटरी: मानवता के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने की दिशा में एक साझा मंच।
- G20 अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर: अगले दशक में अफ्रीका में 10 लाख प्रशिक्षित ट्रेनर तैयार करने का लक्ष्य ताकि स्थानीय क्षमता बढ़ सके।
- G20 ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम: वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों में तैनात होने वाला विशेषज्ञ दल।
- G20 ओपन सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप: कृषि, मत्स्य और आपदा प्रबंधन में विकासशील देशों के लिए स्पेस डेटा की आसान उपलब्धता।
- G20 क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलैरिटी इनिशिएटिव: रीसाइक्लिंग, अर्बन माइनिंग और सेकंड-लाइफ बैटरियों को बढ़ावा देकर आपूर्ति शृंखला को मजबूती देना।
- G20 इनिशिएटिव ऑन काउंटरिंग द ड्रग–टेरर नेक्सस: ड्रग तस्करी और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक के लिए समन्वित कार्रवाई।
शिखर सम्मेलन के साझा घोषणापत्र में भारत से जुड़े प्रमुख बिंदु भी स्पष्ट रूप से झलके—
• आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा।
• डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित-विश्वसनीय AI के विकास पर जोर।
• महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण व ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ को समर्थन।
• आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह और CDRI की भूमिका को मान्यता।
• खाद्य सुरक्षा के लिए डेक्कन सिद्धांतों को मजबूती।
• पारंपरिक चिकित्सा की वैश्विक भूमिका की पुष्टि।
• जलवायु वित्त को ट्रिलियन डॉलर स्तर तक बढ़ाने की आवश्यकता का उल्लेख और विकासशील देशों की 2030 तक की 5.8–5.9 ट्रिलियन डॉलर की ज़रूरत को मान्यता।
• सतत जीवनशैली (LiFE) के महत्व पर जोर।
• संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की मांग को भी समर्थन मिला।
आपदा प्रबंधन पर संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिक्रिया-केंद्रित दृष्टिकोण के बजाय विकास-केंद्रित मॉडल अपनाना होगा। उन्होंने मिलेट्स (श्री-अन्न) को पोषण और पर्यावरण के संतुलन का महत्वपूर्ण साधन बताया और सुझाव दिया कि डेक्कन प्रिंसिपल्स को आधार बनाकर G20 को खाद्य सुरक्षा का रोडमैप तैयार करना चाहिए।
अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की आवाज़ को और मजबूत करना समय की मांग है। उन्होंने अफ्रीकन यूनियन के G20 का स्थायी सदस्य बनने को ऐतिहासिक कदम बताते हुए इस भावना को अन्य वैश्विक मंचों तक विस्तारित करने की आवश्यकता बताई।

