भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च किया। इसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए भेजा गया।
यह GSLV की 19वीं उड़ान थी। लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद सैटेलाइट को करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर अपनी अंतिम कक्षा में पहुंचाया जाना है।
EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। इस कक्षा में सैटेलाइट पृथ्वी के घूमने की गति के साथ तालमेल बनाए रखता है और बड़े भौगोलिक क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें लेने में सक्षम होता है।
भारत का पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट
EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग करने वाला भारत का पहला सैटेलाइट बताया गया है। इसमें मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर लगे हैं, जो अलग-अलग प्रकाश तरंगों में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम हैं।
इससे बड़े इलाकों में मौसम, कृषि और पर्यावरण से जुड़े बदलावों की निगरानी में मदद मिल सकती है। सैटेलाइट से बाढ़, चक्रवात, भारी बारिश और जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी और उनके प्रभाव का आकलन भी किया जा सकेगा।इसकी खासियत छोटे क्षेत्रों की बेहद बारीक तस्वीरें लेने के बजाय बड़े इलाके की बार-बार इमेजिंग करना है।
संवेदनशील इलाकों की निगरानी में भी मदद
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित होने के बाद EOS-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकों की लगातार निगरानी करने में सक्षम होगा। इससे रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए भी डेटा उपलब्ध हो सकता है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी की सतह से करीब 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित होती है। इस कक्षा में सैटेलाइट पृथ्वी के एक चक्कर को लगभग 24 घंटे में पूरा करता है।
इसके मुकाबले लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO पृथ्वी के काफी करीब होती है, जहां सैटेलाइट किसी एक इलाके के ऊपर सीमित समय के लिए ही रहता है।
इसरो के लिए अहम मिशन
EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया। GSLV को भारी उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस और उससे जुड़ी कक्षाओं में पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है।
इससे पहले GSLV की F16 उड़ान के जरिए जुलाई 2025 में NASA-ISRO का NISAR सैटेलाइट लॉन्च किया गया था।
केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मिशन की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों और टीम को बधाई दी। उन्होंने EOS-05 को अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट बताया और कहा कि इससे भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी।
लॉन्च को देखने के लिए श्रीहरिकोटा में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और अंतरिक्ष प्रेमी भी पहुंचे थे। बारिश के बावजूद लोग लॉन्च-व्यूइंग क्षेत्र में मौजूद रहे।इसरो प्रमुख वी. नारायणन के मुताबिक, संगठन की ओर से इस साल छह और मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

