कूनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण प्रयासों को बड़ी कामयाबी मिली है। भारत में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ ने पहली बार पाँच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। पार्क प्रबंधन के अनुसार, मां और सभी शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं।
यह घटना इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि भारत में जन्मी किसी मादा चीता द्वारा देश में ही सफल प्रजनन का यह पहला मामला है। विशेषज्ञ इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मान रहे हैं।
‘मुखी’ लगभग 33 महीने की मादा चीता है और वह भारत में जन्मी पहली पीढ़ी की चीता है जिसने अब सफलतापूर्वक दूसरी पीढ़ी को जन्म दिया है। यह संकेत है कि अफ्रीका से लाई गई चीता प्रजाति भारत के वातावरण और पारिस्थितिकी में लगातार अनुकूलन कर रही है।
इस नए जन्म के साथ, भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 32 हो गई है—जिनमें से 29 कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर अभयारण्य में हैं। इससे पहले कूनो में 9 वयस्क चीते और 16 भारत-जन्मे शावक मौजूद थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि ‘चीता पुनर्स्थापन’ परियोजना को “स्थायी प्रजनन” के चरण तक ले जाती है, जो संरक्षण प्रयासों के सफल भविष्य का संकेत है।

