टी.आर सैनी ( नैनवां – बून्दी )
नैनवां19 जून । गांवों के बच्चों के सपने अक्सर खेतों की मेड़ों, स्कूल के कमरों और किताबों के पन्नों तक सीमित रह जाते हैं। हवाई जहाज में बैठना तो दूर, कई बच्चे उसे केवल आसमान में उड़ते हुए देखकर ही खुश हो जाते हैं। लेकिन बूंदी जिले के छोटे से गांव बंबूली में एक ऐसी पहल हुई, जिसने दो विद्यार्थियों के सपनों को सचमुच पंख दे दिए।
“पढ़ेगा बंबूली, तो उड़ेगा बंबूली” की सोच के साथ गांव के युवा समाजसेवी मुकेश धाकड़ ने एक अनूठी शुरुआत की। उन्होंने अपने निजी खर्च पर गांव के दो मेधावी विद्यार्थियों को उनकी जिंदगी की पहली हवाई यात्रा कराई और दिल्ली-जयपुर के पांच दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा।
यह केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि मेहनत, लगन और शिक्षा के दम पर गांव का बच्चा भी किसी से कम नहीं है।
टॉपर बने, तो मिला आसमान छूने का मौका
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बंबूली के बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का चयन किया गया। कक्षा 12वीं के अवधेश नागर ने 87 प्रतिशत तथा कक्षा 10वीं के सलीम मोहम्मद ने 86 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
जब दोनों छात्रों को बताया गया कि उन्हें हवाई जहाज से दिल्ली ले जाया जाएगा, तो पहले तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। परिवार के लिए भी यह किसी सपने के सच होने जैसा था।
बादलों के बीच पहली उड़ान
14 जून को जयपुर एयरपोर्ट से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में बैठे दोनों छात्र उत्साह से भरे हुए थे। विमान जैसे ही बादलों के ऊपर पहुंचा, उनकी आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी।
खिड़की से बाहर झांकते हुए अवधेश ने कहा, “बादल तो रुई के बड़े-बड़े गोले जैसे दिखाई दे रहे हैं। नीचे की दुनिया खिलौनों जैसी लग रही है।”
सलीम के लिए भी यह अनुभव अविस्मरणीय रहा। उसने कहा, “इतनी मेहनत से पढ़ाई की थी, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि उसका ऐसा इनाम मिलेगा।”
किताबों से निकलकर लोकतंत्र के मंदिर तक
दिल्ली पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने देश की राजधानी के कई महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण किया। राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री संग्रहालय, नया संसद भवन, लाल किला और इंडिया गेट को करीब से देखने का अवसर मिला।
सबसे खास पल तब आया जब विद्यार्थियों ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन किया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने गांव की समस्याओं को भी सामने रखा। उन्होंने अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र और विद्यालय में अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता बताई। बच्चों की जागरूकता और आत्मविश्वास ने सभी को प्रभावित किया।
जयपुर ने बढ़ाया गौरव का एहसास
दिल्ली के बाद जयपुर भ्रमण भी विद्यार्थियों के लिए यादगार रहा। उन्होंने वर्ल्ड ट्रेड पार्क, Albert Hall Museum और City Park का भ्रमण किया।
अल्बर्ट हॉल में राजस्थान के इतिहास और संस्कृति को देखकर अवधेश ने गर्व से कहा, “राजस्थान सचमुच वीरों और शूरवीरों की धरती है।”
एक पहल, जो बदल सकती है सोच
मुकेश धाकड़ का मानना है कि गांव के बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यदि मेहनती विद्यार्थियों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलेगा तो शिक्षा के प्रति आकर्षण स्वतः बढ़ेगा।
उनकी यह पहल केवल दो बच्चों तक सीमित नहीं है। इसने पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। अब कई बच्चे यह सोचने लगे हैं कि अच्छी पढ़ाई उन्हें भी ऐसे अवसर दिला सकती है।
सफलता की असली उड़ान
अवधेश और सलीम की यह यात्रा केवल दिल्ली और जयपुर तक की नहीं थी। यह यात्रा थी आत्मविश्वास की, सपनों की और उस विश्वास की कि गांव का एक साधारण छात्र भी मेहनत के बल पर आसमान छू सकता है।
बंबूली के इन दो विद्यार्थियों ने जब बादलों के ऊपर उड़ान भरी, तब केवल एक विमान नहीं उड़ा था, बल्कि शिक्षा, प्रेरणा और उम्मीदों ने भी नई ऊंचाइयों को छुआ था।

