जयपुर, 5 अगस्त – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजधानी के बिड़ला सभागार में आयोजित “मुख्यमंत्री संग रक्षाबंधन – आंगनबाड़ी बहन सम्मान समारोह” में प्रदेश की 1.21 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राखी उपहार स्वरूप 501-501 रुपये की राशि डीबीटी के जरिए ट्रांसफर की। इस अवसर पर आंगनबाड़ी बहनों से राखी बंधवाकर मुख्यमंत्री ने सुपोषित राजस्थान का संकल्प लिया और कहा कि “आंगनबाड़ी केंद्र समाज में संस्कारों के केंद्र हैं। महिलाएं अगर सशक्त होंगी, तो ही देश और प्रदेश सशक्त बनेंगे।”
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि रक्षाबंधन (9 अगस्त) और उसके अगले दिन (10 अगस्त) को प्रदेश की सभी महिलाएं राजस्थान रोडवेज बसों में राज्य की सीमाओं के भीतर दो दिन नि:शुल्क यात्रा कर सकेंगी। यह सुविधा पहली बार दो दिनों के लिए दी जा रही है, जबकि पहले केवल एक दिन की छूट मिलती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि “कोई भी बहन अपने भाई से मिलने से वंचित न रहे, यही हमारा प्रयास है।”
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा व सम्मान का वादा करते हुए कहा कि “मेरी कलाई पर बांधी गई राखी मेरे लिए सुरक्षा कवच है।” उन्होंने आंगनबाड़ी बहनों को छाता और मिठाई भी भेंट की। साथ ही उन्होंने प्रदेश में 1,000 नए आंगनबाड़ी केंद्र खोलने, 2,365 मॉडल केंद्र विकसित करने और केंद्रों की मरम्मत के लिए 50 करोड़ रुपये मंजूर करने जैसे फैसलों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि “मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना” के तहत अब 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सप्ताह में पांच दिन गर्म मीठा दूध उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा कुपोषित बच्चों के लिए स्किम्ड दूध की मात्रा बढ़ाकर 25 ग्राम कर दी गई है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री डॉ. मंजू बाघमार भी उपस्थित रहीं। दीया कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़े कदम उठाए गए हैं। राजस्थान में “लखपति दीदी योजना” के तहत अब तक 18.25 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित कर 9.25 लाख महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया है। साथ ही, महिलाओं को 450 रुपये में गैस सिलेंडर, बेटियों को स्कूटी व साइकिल, और मातृत्व स्वास्थ्य सुविधाएं जैसी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे महिला सशक्तीकरण और सामाजिक मूल्यों को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

