प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर लोकसभा में अपने संबोधन की झलकियां साझा करते हुए कहा कि मौजूदा हालात भारत के लिए भी चुनौतियां लेकर आए हैं, लेकिन सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट के बीच संसद से एकजुट संदेश दुनिया तक जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में काम कर रही है।
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने तेल और गैस के आयात स्रोतों में विविधता लाते हुए 27 की बजाय अब 41 देशों से आयात बढ़ाया है, ताकि संभावित संकट का प्रभाव कम किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है, जिसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इस पर है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में भारत पहले भी एकजुटता के साथ चुनौतियों का सामना कर चुका है और इस बार भी धैर्य, संयम और समन्वय के साथ परिस्थितियों से निपटा जाएगा। प्रधानमंत्री ने सभी पक्षों से संवाद के जरिए तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

