गुजरात के गिर सोमनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में हिस्सा लिया। यह समारोह मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
प्रधानमंत्री ने मंदिर में विशेष महापूजा, कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण अनुष्ठान में भाग लिया। इस दौरान भारतीय वायुसेना के ‘सूर्य किरण एरोबेटिक टीम’ ने हवाई प्रदर्शन किया, जबकि चेतक हेलीकॉप्टरों से मंदिर शिखर पर पुष्पवर्षा की गई।
सोमनाथ पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री ने रोड शो किया और सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच उनका स्वागत किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की “अविनाशी आस्था और सांस्कृतिक चेतना” का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार मंदिर को नष्ट करने की कोशिश हुई, लेकिन यह हर बार फिर से खड़ा हुआ।
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। उन्होंने कहा कि “सोमनाथ की यात्रा विध्वंस से सृजन तक की यात्रा है।”
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक दबाव के बावजूद ‘ऑपरेशन शक्ति’ के जरिए दुनिया को अपनी वैज्ञानिक क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई थी।
मोदी ने कहा कि “राष्ट्र सर्वोपरि” की भावना के साथ भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि कोई भी शक्ति भारत को झुका नहीं सकती। उन्होंने पोखरण परीक्षणों को शिव और शक्ति की भारतीय परंपरा से भी जोड़ा।
सोमनाथ अमृत महोत्सव, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ श्रृंखला का हिस्सा है, जो मंदिर पर पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।

