राजस्थान विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने जनप्रतिनिधियों से जुड़े एक समाचार पत्र के स्टिंग ऑपरेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि कोई भी जनप्रतिनिधि जनसेवा के नाम पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग करता है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।
राठौड़ ने इस मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा त्वरित संज्ञान लेने की सराहना की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को राज्य के मुख्य सतर्कता आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति के माध्यम से जांच के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा मामले को सदाचार समिति को सौंपे जाने को उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में अहम कदम बताया।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजस्थान के लोकतंत्र की परंपरा ऐसी नहीं रही है और इस तरह के प्रकरणों का सामने आना चिंताजनक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे अधिक जरूरी है कि यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
राठौड़ ने उम्मीद जताई कि दोनों समितियां जल्द ही निष्पक्ष जांच पूरी करेंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा शुचिता, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम रही है।

