राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कांग्रेस नेता सचिन पायलटने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे सत्ता में हों या विपक्ष में, हर परिस्थिति में ईमानदारी के साथ जनता के बीच रहें और उनकी भावनाओं के आधार पर काम करें।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है—किसे चुनना है और किसे नहीं। ऐसे में जो भी प्रतिनिधि चुना जाता है, उसे बिना भेदभाव के सभी के लिए काम करना चाहिए, चाहे किसी ने उसे वोट दिया हो या नहीं।
अपने संबोधन में पायलट ने बदलते समय और नई पीढ़ी की अपेक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि काम करने के तरीके समय के साथ बदलने चाहिए, लेकिन अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने युवाओं से शिक्षा और संस्कार को प्राथमिकता देने की अपील की और कहा कि यही समाज और देश के विकास की कुंजी है।
पायलट ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत की परंपरा प्रेम, भाईचारे और सह-अस्तित्व की रही है, जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नफरत और हिंसा से किसी का भला नहीं होता।
देश की मौजूदा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई को बड़ी चुनौतियां बताया और कहा कि किसानों की स्थिति भी चिंताजनक है। उन्होंने लोगों से अच्छे नेतृत्व का चयन करने और एकजुट रहने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में पायलट ने जनता के समर्थन के लिए आभार जताया और भरोसा दिलाया कि वे अन्याय और कठिन परिस्थितियों में हमेशा लोगों के साथ खड़े रहेंगे।

