जयपुर:-कॉलेज का पहला दिन हर छात्र के लिए खास होता है। नए दोस्त, नया कैंपस, नई उम्मीदें और भविष्य को लेकर कई सवाल। लेकिन कुछ शुरुआतें सिर्फ एक नए सैशन का पहला दिन नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की सोच और दिशा तय कर जाती हैं। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में शुरू हुए ‘ओरिएंट 2026’ का पहला दिन कुछ ऐसा ही रहा। 6972 स्टूडेंट्स ने अपने कॉलेज जीवन की शुरुआत ऐसे मंच से की, जहाँ खेल, अंतरिक्ष, सिनेमा, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अकादमिक नेतृत्व से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।
जेईसीआरसी की छात्राओं के साथ कोर्ट पर उतरीं साइना नेहवाल, कहा— बैडमिंटन में आगे बढ़ने वाली हर बेटी को मेरा पूरा साथ मिलेगा
पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित भारत की पहली विश्व नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के साथ यादगार समय बिताया। उन्होंने विश्वविद्यालय की 50 से अधिक छात्राओं के साथ बैडमिंटन कोर्ट पर मैच खेला और उनका उत्साह बढ़ाया। छात्राओं के साथ खेलते हुए उन्होंने खेल की बारीकियां भी साझा कीं और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर साइना ने कहा कि यदि बैडमिंटन में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाली किसी भी छात्रा को कभी उनकी जरूरत पड़े, तो वह हमेशा उसके साथ खड़ी रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत होती है, तो उसके उद्घाटन के लिए वह स्वयं जरूर आएंगी और इस पहल को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग देंगी।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साइना ने कहा कि सफलता किसी एक बड़े मौके से नहीं, बल्कि रोज़ की मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से मिलती है। उन्होंने अपने माता-पिता को अपना पहला रोल मॉडल बताते हुए विद्यार्थियों से अपने सपनों को प्राथमिकता देने, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने का संदेश दिया।
सिर्फ 8 मिनट में 28,500 किमी प्रति घंटे की रफ्तार… शुभांशु शुक्ला ने सुनाया अंतरिक्ष सफर का रोमांच
अशोक चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के ओरिएंट 2026 में विद्यार्थियों को अपने अंतरिक्ष मिशन की ऐसी झलक दिखाई, जिसने पूरे सभागार को रोमांच और उत्साह से भर दिया। भारत के 75 वर्षों के अंतरिक्ष इतिहास में अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले वे केवल दूसरे भारतीय हैं। उन्होंने लगभग 30 मिनट की विशेष प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने मिशन से जुड़े कई दुर्लभ वीडियो और तस्वीरें दिखाईं, जो सामान्य तौर पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इन वीडियो में उन्होंने अंतरिक्ष तक की अपनी यात्रा, स्पेसक्राफ्ट के भीतर के अनुभव, भारहीनता में जीवन और अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली पृथ्वी के अद्भुत दृश्य साझा किए। उनकी इस प्रस्तुति ने विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति गहरी जिज्ञासा और उत्साह पैदा कर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किस तरह रॉकेट ने सिर्फ आठ मिनट में शून्य से लगभग 28,500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ते हुए उन्हें अंतरिक्ष तक पहुंचाया। इस दौरान शरीर पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव (जी-फोर्स) और शरीर की प्रतिक्रियाओं का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह महसूस होता है कि ऊपर क्या है और नीचे क्या है, इसका अंदाज़ा ही नहीं लग पाता। गुरुत्वाकर्षण की दिशा का एहसास पूरी तरह बदल जाता है और शरीर का संतुलन (ओरिएंटेशन) कुछ समय के लिए पूरी तरह भ्रमित हो जाता है।
शुभांशु शुक्ला ने अपनी वीडियो के माध्यम से यह भी दिखाया कि भारहीनता (ज़ीरो ग्रैविटी) में शरीर किस तरह अलग व्यवहार करता है। उन्होंने बताया कि 420 टन वजनी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी वहां इतना हल्का महसूस होता है कि हजारों किलोग्राम वजनी वस्तु को भी हल्के से हाथ लगाने पर आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में शरीर का तरल पदार्थ ऊपर की ओर खिसकने लगता है, जिससे चेहरा सामान्य से थोड़ा बड़ा या फूला हुआ दिखाई देता है, कद भी कुछ सेंटीमीटर तक बढ़ जाता है और हृदय को पृथ्वी की तुलना में रक्त पंप करने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने इसे विज्ञान का अद्भुत अनुभव बताते हुए कहा कि अंतरिक्ष में हर पल कुछ नया सीखने और महसूस करने का अवसर मिलता है। इन दुर्लभ वीडियो और रोचक किस्सों ने विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रस्तुति के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष से पूरी पृथ्वी एक परिवार की तरह दिखाई देती है, जिससे मानवता और साझा जिम्मेदारी का भाव और भी मजबूत होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, असफलताओं से सीखने और बड़े सपने देखने का आह्वान किया। नए भारत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “आज का भारत शक्तिशाली, साहसी, महत्वाकांक्षी और निडर है। यही आत्मविश्वास भारत को आज भी ‘सारे जहाँ से अच्छा’ बनाता है।”
नेशनल अवार्ड विजेता अभिनेता विक्रांत मैसी ने जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल के साथ मंच पर एक विशेष संवाद में अपने जीवन और करियर के अनुभव साझा किए। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती। अभिनय की दुनिया में पहचान बनाने से पहले उन्होंने कॉफी शॉप में भी काम किया, लेकिन अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण और निरंतर प्रयासों ने उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
AI सब बदल सकता है, लेकिन इंसान का इंसान से जुड़ाव कभी नहीं बदलेगा” — विक्रांत मैसी
जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल के साथ मंच पर हुए विशेष संवाद में नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेता विक्रांत मैसी ने विद्यार्थियों से अपने संघर्ष, करियर और जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अभिनय की दुनिया में पहचान बनाने से पहले उन्होंने कॉफी शॉप में भी काम किया, लेकिन कभी अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती, बल्कि धैर्य, लगातार मेहनत और खुद पर विश्वास से हासिल होती है।
संवाद के दौरान अर्पित अग्रवाल ने विक्रांत मैसी से पूछा कि आज जब एआई, इंटरनेट और नई तकनीकें तेजी से बदल रही हैं, तो ऐसी कौन-सी बात है जिसे विद्यार्थी अपनी स्टडी टेबल या कमरे की दीवार पर लिखकर रखें, क्योंकि वह समय के साथ कभी नहीं बदलेगी। इस पर विक्रांत ने कहा, “दुनिया चाहे जितनी बदल जाए, तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदलेगी और मुझे उम्मीद है कि वह कभी नहीं बदलेगी—वह है इंसान का इंसान से जुड़ाव (Human to Human Connection)।” उन्होंने कहा कि इंसान की महसूस करने, संवेदनशील होने और एक-दूसरे की भावनाओं को समझने की क्षमता किसी भी तकनीक या एआई से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यही मानवीय जुड़ाव इस दुनिया को बेहतर बनाए रखने की सबसे बड़ी ताकत है।
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए विक्रांत मैसी ने कहा कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल नाम, शोहरत या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मन की शांति, परिवार का साथ और जीवन में संतुलन से है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी सफलता की परिभाषा स्वयं तय करने, असफलताओं से सीखने और हर परिस्थिति में अपने सपनों के प्रति ईमानदार बने रहने का संदेश दिया। अर्पित अग्रवाल और विक्रांत मैसी के बीच युवाओं के सपनों, करियर, संघर्ष और बदलते भारत में अवसरों पर हुई इस खुली बातचीत को विद्यार्थियों ने बेहद पसंद किया और पूरे सत्र के दौरान तालियों की गूंज से उनका उत्साहवर्धन किया।
जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन ओ.पी. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता का आधार केवल शिक्षा नहीं, बल्कि परिवार से मिले संस्कार, मजबूत मूल्य, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण है। उन्होंने युवाओं से आत्ममंथन करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने जेईसीआरसी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल की आगामी शुरुआत की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ समाज को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने इसे जेईसीआरसी की समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के हेड – डिजिटल स्ट्रेटेजी धीमंत अग्रवाल ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस वर्ष ओरिएंट 2026 में देश के 28 राज्यों से 6,972 विद्यार्थी जेईसीआरसी परिवार का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि यह विविधता जेईसीआरसी की राष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है और यह भी साबित करती है कि जयपुर तेजी से देश के प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टि, निरंतर सीखने की जिज्ञासा और नई चुनौतियों को स्वीकार करने की सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरक संवाद विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, व्यावसायिक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देते हैं तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. विक्टर गंभीर ने कहा कि जेईसीआरसी आज नई शिक्षा नीति के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू कर चुका है। अब विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार मेजर और माइनर विषयों का चयन कर सकते हैं तथा पहले वर्ष से ही उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का लाभ उठा सकते हैं।

