महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (UBT) के भीतर संभावित टूट को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और पार्टी में विलय की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक न तो लोकसभा अध्यक्ष की ओर से और न ही कथित बागी सांसदों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।
इन अटकलों के बीच शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी नेताओं को खुली चेतावनी दी है। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा कि जो भी नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता के बीच जाकर जनादेश हासिल करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं और इस संबंध में उनके पास जानकारी है।
राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिन नेताओं को चुनाव जिताने के लिए मेहनत की, यदि वे पार्टी छोड़ते हैं तो इसे जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की जनता इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों पर चुप नहीं बैठेगी।
शिवसेना (UBT) ने अपने सांसदों की बैठक बुलाने के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। वहीं, महाराष्ट्र में चल रहे कथित “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
इस बीच भाजपा विधायक आशीषराव देशमुख ने दावा किया कि संजय राउत उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार गुट के कांग्रेस में विलय की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे पर संबंधित दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उधर, विपक्षी दलों में टूट की चर्चाओं के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी में भी बड़े राजनीतिक बदलाव का दावा किया है। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट और मजबूत है।
शिवसेना (UBT) के भीतर संभावित टूट की ये चर्चाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद पार्टी पहले ही एक बड़े विभाजन का सामना कर चुकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और सांसदों की बैठक से क्या तस्वीर सामने आती है।

