शुभांशु शुक्ला और Axiom-4 मिशन की टीम की सफल वापसी,18 दिन बाद अंतरिक्ष से लौटे भारतीय अंतरिक्ष यात्री

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भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में 18 दिन बिताने के बाद सोमवार दोपहर धरती पर सुरक्षित लौट आए। अमेरिका के कैलिफोर्निया तट पर स्थानीय समयानुसार दोपहर 3 बजे स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की सफल “स्प्लैशडाउन” लैंडिंग हुई।

शुभांशु और उनकी टीम रविवार शाम 4:45 बजे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पृथ्वी के लिए रवाना हुई थी। करीब 23 घंटे के सफर के बाद उनका यान प्रशांत महासागर में उतरा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु की वापसी पर उन्हें बधाई देते हुए कहा, “शुभांशु ने अपने समर्पण और साहस से देश के करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है। यह गगनयान मिशन की दिशा में एक और बड़ा कदम है।”

18 दिनों में क्या-क्या किया शुभांशु ने?

  • 60 वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया, जिनमें भारत के 7 प्रयोग भी शामिल थे। इनमें मेथी और मूंग की खेती से लेकर हड्डियों पर माइक्रोग्रैविटी के असर का अध्ययन तक शामिल रहा।
  • प्रधानमंत्री से संवाद: 28 जून को शुभांशु ने पीएम मोदी से वीडियो कॉल पर बात की। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष से भारत बेहद भव्य दिखाई देता है।
  • छात्रों से बातचीत: तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और लखनऊ के 500 से अधिक छात्रों से हैम रेडियो के जरिए संवाद कर उन्हें विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति प्रेरित किया।
  • ISRO अधिकारियों से बातचीत की और भारत के गगनयान मिशन में योगदान पर चर्चा की।
  • पृथ्वी की दुर्लभ तस्वीरें लीं, जिन्हें कपोला मॉड्यूल की खिड़कियों से शूट किया गया।

41 साल बाद किसी भारतीय की अंतरिक्ष यात्रा

शुभांशु शुक्ला, 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। वे Axiom-4 मिशन के तहत स्पेस में गए थे, जिसके लिए भारत ने एक्सियम स्पेस को ₹548 करोड़ का भुगतान किया था।

Axiom-4 मिशन, NASA, ISRO, SpaceX और एक्सियम स्पेस की साझेदारी में आयोजित हुआ। ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने 25 जून को कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी।

शुभांशु की यह यात्रा भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए एक मील का पत्थर मानी जा रही है, जिसे 2027 तक लॉन्च किया जाना है।

क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)?

ISS एक कक्षा में स्थित अंतरिक्ष प्रयोगशाला है, जो हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करती है। इसकी गति लगभग 28,000 किमी/घंटा है। यह NASA, Roscosmos, ESA, JAXA और CSA सहित पांच अंतरिक्ष एजेंसियों की साझेदारी से संचालित होता है।

शुभांशु की यह ऐतिहासिक वापसी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ती है। वे 17 अगस्त तक भारत लौट सकते हैं, जब तक कि उनकी मेडिकल जांच और पुनर्वास प्रक्रिया पूरी न हो जाए।