सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़ा अध्याय शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। बुधवार को सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले में कानून अपना काम करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अदालत इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेने पर विचार कर रही है।
यह मामला तब सामने आया जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने अदालत को बताया कि आठवीं कक्षा के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार जैसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बार की ओर से इस पर गंभीर आपत्ति जताई जा रही है। वहीं अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि पुस्तक में भ्रष्टाचार के संदर्भ में चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया है और अन्य क्षेत्रों जैसे नौकरशाही, राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार का उल्लेख नहीं किया गया है। इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि सामग्री पहली नजर में संविधान के मूल ढांचे के विपरीत प्रतीत होती है।
दरअसल, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई पुस्तक में न्यायपालिका की संरचना, जवाबदेही प्रणाली, लंबित मामलों और न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों पर एक नया सेक्शन जोड़ा गया है। अध्याय में सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है।
पुस्तक में यह भी बताया गया है कि न्यायाधीश आचार संहिता से बंधे होते हैं और न्यायपालिका के भीतर जवाबदेही के तंत्र, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों का विवरण दिया गया है। इसमें यह उल्लेख भी है कि केंद्रीय जन शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) के माध्यम से 2017 से 2021 के बीच बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुईं।
किताब में न्यायाधीशों को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया, संसद द्वारा महाभियोग प्रस्ताव और जांच प्रक्रिया का भी विवरण शामिल है। साथ ही यह भी कहा गया है कि न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही से सार्वजनिक विश्वास को मजबूत किया जा सकता है। पुस्तक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के उस बयान का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों का सार्वजनिक विश्वास पर प्रभाव और पारदर्शी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया था।

