जयपुर, 4 जुलाई 2026, कल राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ में घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अधिसूचित उपजो की सरकार द्वारा खरीद नहीं करने के कारण उत्पादक किसानों को होने वाले घाटे से बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को खरीद के गारंटी का कानून बनाने संबंधी 11407/2018 जनहित याचिका पर सुनवाई की।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीवप्रकाश शर्मा एवं मनीष शर्मा ने याची की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा मनोनीत न्याय मित्र एडवोकेट प्रदीप चौधरी के साथ याची रामपाल जाट से भी प्रश्न पूछने के उपरांत भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए अधिसूचित उपजो की खरीद नहीं करने तथा खरीद का ‘आधारभूत ढांचा, नहीं बनाने के संबंध में राजस्थान राज्य द्वारा नियुक्त अतिरिक्त महाधिवक्ता गुरचरण सिंह गिल, भारत संघ की ओर से नियुक्त एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास एवं नेफैड कों कारण दर्शित करने के निर्देश के अंतर्गत लिखित उत्तर प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
याची रामपाल जाट की ओर से राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 की धारा 9(2)(XII) को अज्ञात्मक प्रावधान के रूप में परिवर्तित कर चीनी उद्योगों की भांति न्यूनतम समर्थन मूल्य से ही खरीद आरंभ करनें प्रार्थना की। इसी क्रम में ‘वेयरहाउसिंग विकास एवं नियमन अधिनियम, 2007’ तथा उसकी पालना के लिए वर्ष 2010 में बनाए गए नियमों के क्रियान्वयन के अंतर्गत बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव रहने पर गोदाम में गिरवी रखकर उपजो पर निर्धारित ब्याज पर ऋण उपलब्ध करने की सुविधा हेतु तंत्र विकसित करने की भी प्रार्थना की। राजस्थान में वर्ष 2012 के बाद बाजरे की खरीद नहीं होने से हो रहे घाटे सहित मक्का,मूंग, चना इत्यादि उपजो के घाटे का भी उल्लेख किया। घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्नों के लिए भारतीय खाद्य निगम तथा दलहन तिलहन की उपजो की खरीद के लिए केंद्र की ओर से नेफैड तथा राज्य की ओर से राजफैड द्वारा अधिकतम 90 दिन के प्रावधान होते हुए भी खरीद के वास्तविक 60 से लेकर 65 दिन रहने को भी घाटे के लिए उत्तरदाई होने का उल्लेख किया। इस वर्ष चना खरीद के लिए नेफेड एवं एनसीसीएफ द्वारा शत प्रतिशत उपजो की खरीद हेतु मानक संचालन प्रक्रिया नियम होते हुए भी राजस्थान में चने की खरीद नगण्य रही, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर अपनी उपज बेचने को विवश होना पड़ा। यही स्थिति लगभग प्रतिवर्ष रहती है।
इसी के साथ गेहूं, बाजरा, मक्का जैसे खाद्यान्नों की खरीद के लिए भारतीय खाद्य निगम तथा राज्य में तिलहन एवं दलहन की खरीद के लिए राजफैड को पक्षकार के रूप में संयोजित करने का आदेश पारित किया।
इस याचिका में पूर्व में 12 जुलाई 2019 को न्यायाधीश मोहम्मद रफीक एवं नरेंद्र सिंह डीकी खंडपीठ ने विषय विशेषज्ञ यथा यथा-भारत संघ के कृषि मंत्री एवं राजस्थान राज्य के कृषि विभाग से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की श्रेष्ठतम नीति एवं क्रियान्वयन के संबंध में सुझाव देने हेतु निर्देशित करते हुए 11 सितंबर 2019 की तारीख निश्चित की थी। तब से लेकर अब तक भारत संघ की ओर से समय प्रदान करने की ही प्रार्थना की जाती रही, याची की प्रार्थना पर खंडपीठ ने अंतिम अवसर प्रदत कर आगामी सुनवाई के लिए 30 जुलाई 2026 का दिन निर्धारित किया है।

