राजस्थान सरकार ने घोषणा की है कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाएंगे। सरकार ने बुधवार को इस संबंध में अपना जवाब राजस्थान हाईकोर्ट में पेश किया। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकलपीठ गुरुवार को करेगी।
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि यह फैसला “ठोस कारणों” और “विद्यार्थियों के व्यापक हित” को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जवाब के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के क्रियान्वयन के बीच छात्रसंघ चुनाव कराना संभव नहीं है।
बैठक में बनी सहमति
6 अगस्त को अतिरिक्त मुख्य उच्च शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं ने भाग लिया। इसमें जयपुर, बीकानेर, भरतपुर, उदयपुर, सीकर, बांसवाड़ा, कोटा, जोधपुर और अजमेर के विश्वविद्यालयों के कुलगुरु मौजूद थे। सभी ने इस सत्र में छात्रसंघ चुनाव न कराने पर सहमति जताई।
कुलगुरुओं का कहना था कि चुनाव के दौरान पढ़ाई प्रभावित होती है और कॉलेज-कैंपस का माहौल बिगड़ता है। उनका यह भी मानना है कि विद्यार्थी और फैकल्टी अभी तक एनईपी 2020 को पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं।
लिंगदोह कमेटी का हवाला
सरकार ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिश का हवाला देते हुए कहा कि सत्र शुरू होने के 6 से 8 हफ्तों के भीतर चुनाव होने चाहिए, लेकिन इस बार यह समय सीमा बीत चुकी है। ऐसे में चुनाव कराना उचित नहीं है।
सरकार का यह भी कहना है कि चुनाव न कराने से याचिकाकर्ताओं के हित प्रभावित नहीं हो रहे हैं, इसलिए उनसे जुड़ी याचिकाएं खारिज की जाएं।
गौरतलब है कि छात्र जय राव और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की थी। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा था।

