अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में ग्रीनलैंड को लेकर अपने रुख को दुनिया के सामने सही ठहराया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा अमेरिका के अलावा कोई और देश नहीं कर सकता। हालांकि ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा।
अपने भाषण में ट्रम्प ने डेनमार्क पर नाराजगी जताते हुए उसे ‘एहसान फरामोश’ करार दिया। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने ही ग्रीनलैंड की रक्षा की थी और बाद में उसे डेनमार्क को लौटा दिया, जिसे उन्होंने अमेरिका की “बड़ी गलती” बताया। ट्रम्प ने शिकायती लहजे में कहा कि वह “सिर्फ एक बर्फ का टुकड़ा” चाहते हैं, लेकिन यूरोप देने को तैयार नहीं है।
ट्रम्प ने यूरोप पर गलत दिशा में जाने का आरोप लगाया और उसकी इमिग्रेशन व आर्थिक नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप को अमेरिका जैसा मॉडल अपनाना चाहिए। कनाडा को लेकर ट्रम्प ने कहा कि यह देश अमेरिका की वजह से ही चल पा रहा है, जबकि वेनेजुएला के संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कदमों से वहां बड़े आर्थिक फायदे होंगे।
नाटो को लेकर भी ट्रम्प ने संदेह जताया कि जरूरत पड़ने पर संगठन अमेरिका की मदद करेगा या नहीं। यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी यूरोप को लेनी चाहिए, क्योंकि अमेरिका इस संघर्ष से बहुत दूर है और पहले ही अरबों डॉलर खर्च कर चुका है।
भाषण के दौरान ट्रम्प ने कुछ देशों और समुदायों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। उनके संबोधन के बाद यूरोपीय संसद की व्यापार समिति ने अमेरिका-यूरोप व्यापार समझौते से जुड़ी वोटिंग फिलहाल रोक दी।
इस बीच, भाषण के बाद भारतीय मीडिया से बातचीत में ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें अपना दोस्त बताया और संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द एक अहम व्यापार समझौता हो सकता है।

