वसुन्धरा राजे कविता सुनकर भावुक हुईं,बोलीं— “माता-पिता और भाई के बिना जीवन सूना”

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राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे एक कार्यक्रम के दौरान भावुक हो गईं और मंच पर रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि अपनी मां राजमाता विजय राजे सिंधिया, पिता जीवाजीराव सिंधिया और भाई माधवराव सिंधिया के बिना उनका जीवन सूना लगता है।

यह अवसर झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र के खोयरा गांव स्थित मुक्तेश्वर मंदिर में सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत का था। कार्यक्रम के दौरान एक युवती द्वारा राजे के परिवार और उनके जीवन पर आधारित कविता सुनाई गई, जिसे सुनकर वह भावुक हो गईं।

भरे गले से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं और जब भी उनकी याद आती है तो वे लोगों के प्रेम में उन्हें महसूस करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए जनता ही परिवार है और उन्हें लोगों का स्नेह ही सबसे बड़ी पूंजी लगता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पदयात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा कि यह यात्रा क्षेत्र के विकास, लोगों की समस्याएं समझने और उनके समाधान की दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने इसे “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना से जुड़ी यात्रा बताया।