केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नवस्नातक चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों का आह्वान किया कि वे करुणा, सत्यनिष्ठा तथा आजीवन सीखने की भावना के साथ राष्ट्र सेवा के लिए स्वयं को समर्पित करें। यह दीक्षांत समारोह पश्चिमी राजस्थान में स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में एम्स जोधपुर की 14 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
समारोह के दौरान एमबीबीएस, बी.एससी. (ऑनर्स) नर्सिंग, एम.एससी. (मेडिकल), एम.एससी. (नर्सिंग), मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (MPH), मेडटेक, पीएच.डी., एम.डी., एम.एस., एम.डी.एस., डी.एम. एवं एम.सीएच. सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के 1,189 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। साथ ही शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 25 मेधावी विद्यार्थियों को संस्थान पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। लोकसभा सांसद श्री पी. पी. चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि एम्स जोधपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तेजस एम. पटेल सम्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने किया। इस अवसर पर संकाय सदस्य, विद्यार्थी, नवस्नातक, अभिभावक, पूर्व छात्र तथा देशभर से आए अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि का संबोधन
अपने दीक्षांत संबोधन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने नवस्नातक विद्यार्थियों, संस्थान पदक प्राप्तकर्ताओं, उनके अभिभावकों, संकाय सदस्यों तथा समूचे एम्स जोधपुर परिवार को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की एक नई यात्रा का शुभारम्भ है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि चिकित्सा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक मिशन है, जिसका उद्देश्य एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र ने उन्हें विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना उपलब्ध कराई है, इसलिए अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे विनम्रता, करुणा, सत्यनिष्ठा और सेवा-भाव के साथ समाज का ऋण चुकाएँ।
पटेल ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान निरंतर विकसित हो रहा है, इसलिए प्रत्येक चिकित्सक के लिए आजीवन सीखते रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकें सिद्धांत सिखाती हैं, किंतु रोगी सबसे बड़े शिक्षक होते हैं। उन्होंने युवा चिकित्सकों से प्रत्येक रोगी की बात धैर्यपूर्वक सुनने, संवेदनशीलता के साथ उपचार करने तथा सदैव मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रोगी दवा का नाम भले भूल जाए, लेकिन चिकित्सक का व्यवहार और उसके द्वारा दिया गया विश्वास जीवनभर याद रखता है। उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे केवल रोग का उपचार ही नहीं, बल्कि रोगी को संपूर्ण रूप से स्वस्थ करने का प्रयास करें।
उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण, दूरस्थ एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्र की वास्तविक सेवा उन लोगों तक पहुँचना है, जो आज भी बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हैं। साथ ही उन्होंने चिकित्सकों से अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आग्रह किया, ताकि वे समाज की अधिक प्रभावी ढंग से सेवा कर सकें। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा जनसामान्य को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले एक दशक में हुए व्यापक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार ने चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को अभूतपूर्व गति दी है। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 384 से बढ़कर 830 से अधिक तथा एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो चुकी है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, जन औषधि केंद्रों, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल ड्रोन, तथा गैर-संचारी रोगों की देशव्यापी स्क्रीनिंग जैसी पहलें गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
एम्स जोधपुर की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र 14 वर्षों में संस्थान ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए देश के शीर्ष 10 चिकित्सा संस्थानों में स्थान बनाया है तथा द्वितीय पीढ़ी के एम्स संस्थानों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान के उत्कृष्ट रोगी उपचार, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति समर्पण का परिचायक है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने नवस्नातक विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सदैव यह स्मरण रखें कि “स्वास्थ्य सेवा कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है”, और अपने चिकित्सकीय जीवन में “केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि रोगी को स्वस्थ करने” को अपना मूल मंत्र बनाएँ।
विशिष्ट अतिथि का संबोधन
लोकसभा सांसद श्री पी.पी. चौधरी ने नवस्नातक विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उनके परिवार, शिक्षकों और समाज के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा की उपाधि केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का आजीवन संकल्प है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वस्थ भारत का निर्माण अत्यंत आवश्यक है और इसमें युवा चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं का स्वरूप तेजी से बदल रहा है तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान और नवाचार चिकित्सा व्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से इन तकनीकों का उपयोग जनसामान्य तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए करने का आह्वान किया।
चौधरी ने एम्स जोधपुर की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। उन्होंने गैर-संचारी रोगों की बढ़ती चुनौती, ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को कम करने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, स्वास्थ्य वित्तपोषण तथा मेडिकल टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अध्यक्ष का संबोधन
इस अवसर पर एम्स जोधपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तेजस एम. पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ एक नई यात्रा का आरम्भ भी है। उन्होंने नवस्नातक विद्यार्थियों एवं उनके परिवारजनों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि एम्स जोधपुर उनके जीवन का सदैव एक अभिन्न हिस्सा रहेगा, जहाँ उन्होंने केवल चिकित्सा ज्ञान और नैदानिक कौशल ही नहीं, बल्कि आजीवन साथ निभाने वाली मित्रताएँ और अमूल्य जीवन अनुभव भी अर्जित किए हैं।
उन्होंने कहा कि आज के युवा चिकित्सक ऐसे दौर में चिकित्सा जगत में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ रोबोटिक सर्जरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), प्रिसिजन मेडिसिन तथा अत्याधुनिक तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से इन तकनीकी प्रगतियों को अपनाने के साथ-साथ प्रत्येक निर्णय के केंद्र में रोगी को रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रोग के पीछे एक मानवीय कहानी होती है और एक अच्छे चिकित्सक की पहचान केवल उसके ज्ञान से नहीं, बल्कि उसकी संवेदनशीलता और करुणा से होती है।
एम्स जोधपुर की 14 वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रो. पटेल ने कहा कि आज यह संस्थान देश के अग्रणी शैक्षणिक चिकित्सा संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है तथा अन्य संस्थानों के मार्गदर्शन की भूमिका भी निभा रहा है। उन्होंने चयनित चिकित्सा क्षेत्रों में एम्स जोधपुर को वैश्विक स्तर का उत्कृष्टता केन्द्र बनाने की अपनी परिकल्पना साझा करते हुए कहा कि सफेद कोट शक्ति का नहीं, बल्कि सेवा, जिम्मेदारी और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने पूरे चिकित्सकीय जीवन में करुणा, नैतिकता और व्यावसायिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
कार्यकारी निदेशक का संबोधन
समारोह में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा पिछले 14 वर्षों में एम्स जोधपुर की उल्लेखनीय उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के अंतर्गत वर्ष 2012 में स्थापित एम्स जोधपुर आज लगभग 45 विभागों एवं केन्द्रों, 221 संकाय सदस्यों, 3,000 से अधिक कर्मचारियों तथा 1,500 से अधिक विद्यार्थियों के साथ देश के अग्रणी शैक्षणिक चिकित्सा संस्थानों में अपनी पहचान बना चुका है। संस्थान प्रतिवर्ष लगभग 500 स्वास्थ्य पेशेवरों को राष्ट्र सेवा के लिए तैयार कर रहा है।
डॉ. पुरी ने कहा कि आज एम्स जोधपुर देश के शीर्ष 10 चिकित्सा संस्थानों में स्थान प्राप्त कर चुका है तथा द्वितीय पीढ़ी के एम्स संस्थानों में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने संस्थान की नवाचार संस्कृति का उल्लेख करते हुए AIIMS Jodhpur Innovation Foundation (AJIF), आईआईटी जोधपुर के सहयोग से संचालित Faculty–Student MedTech Programme, 25 पेटेंट, 17 स्टार्टअप, स्वदेशी जैव-चिकित्सीय उपकरणों के विकास तथा नए एम्स संस्थानों में सर्वाधिक शोध प्रकाशनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास अनुसंधान को जनोपयोगी तकनीकों एवं किफायती स्वास्थ्य समाधान में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने संस्थान के निरंतर विकसित हो रहे स्वास्थ्य अवसंरचना का भी उल्लेख करते हुए 150-बेड आईसीयू, निर्माणाधीन 70-बेड क्रिटिकल केयर ब्लॉक, जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से संचालित एसटीएचआर ट्राइबल सेंटर, आबू रोड, देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार लागू इलेक्ट्रॉनिक पेशेंट चार्टर सिस्टम, तथा परिसर में संचालित अमृत फार्मेसी जैसी पहलों की जानकारी दी। उन्होंने अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों के प्रभावी संचालन हेतु तकनीकी मानव संसाधन को और सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से निरंतर सहयोग का भी आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि प्रथम वर्ष में मात्र 47,500 ओपीडी मरीजों को सेवाएँ प्रदान करने वाला एम्स जोधपुर आज प्रतिवर्ष 14 लाख से अधिक बाह्य रोगियों, 1.37 लाख से अधिक भर्ती मरीजों तथा 1.43 लाख से अधिक शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है। लगभग 1,450 कार्यशील बेड, उन्नत क्रिटिकल केयर सुविधाएँ तथा व्यापक सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के साथ संस्थान आज देश के अग्रणी अंग प्रत्यारोपण केन्द्रों में भी शामिल है, जहाँ अब तक 105 किडनी प्रत्यारोपण, 29 लिवर प्रत्यारोपण तथा 11 बोन मैरो प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक सम्पन्न किए जा चुके हैं। साथ ही संस्थान हृदय एवं फेफड़ा प्रत्यारोपण कार्यक्रम प्रारम्भ करने की दिशा में भी अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी, न्यूरोसाइंसेज़, कार्डियक साइंसेज़, ऑन्कोलॉजी, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, गैस्ट्रो साइंसेज़ एवं अंग प्रत्यारोपण जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता केन्द्रों की स्थापना के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ, एकीकृत हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HMIS), NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएँ, AIIMS Jodhpur Innovation Foundation (AJIF) तथा आईआईटी जोधपुर के साथ सहयोगी कार्यक्रमों ने एम्स जोधपुर को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शैक्षणिक चिकित्सा संस्थानों में स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि India Today–MDRA Best Medical Colleges Ranking 2026 में एम्स जोधपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर आठवाँ स्थान प्राप्त किया है तथा एम्स नई दिल्ली के बाद दूसरा सर्वोच्च रैंक प्राप्त करने वाला एम्स बना है।
समारोह के दौरान एमबीबीएस एवं बी.एससी. (ऑनर्स) नर्सिंग स्नातकों के लिए डिग्री रजिस्टर पर हस्ताक्षर एवं एक्सहॉर्टेशन सेरेमनी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम का समापन एम्स जोधपुर की अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. (डॉ.) पंकजा रवि राघव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके उपरांत डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने औपचारिक रूप से दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा की।
पंचम दीक्षांत समारोह के साथ एम्स जोधपुर ने अपनी उत्कृष्टता की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है। वर्ष 2012 में स्थापित एक नवोदित संस्थान से लेकर आज देश के अग्रणी स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार केन्द्रों में स्थान बनाने तक की यह यात्रा निरंतर प्रगति, समर्पण और उत्कृष्टता की कहानी है। आज उपाधि प्राप्त करने वाले 1,189 नवस्नातक अब उन हजारों पूर्व विद्यार्थियों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जो देशभर में सेवा देते हुए एम्स जोधपुर के उत्कृष्टता, करुणा, नैतिकता और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।

