राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा जोधपुर के मारवाड़ इन्टरनेशनल सेंटर में 25वें भारत रंग महोत्सव का आयोजन कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार, जोधपुर जिला प्रशासन एवं जोधपुर विकास प्राधिकरण के सहयोग से रंग दूत मीता वरिष्ठ एवं प्रदेश के वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल आचार्य के मुख्य आतिथ्य में किया गया।
25वें भारत रंग महोत्सव के आयोजन के पहले दिन नाटक कठपुतलियां का मंचन हुआ। कठपुतलियां नाटक का नायक रामकिशन एक कठपुतली चालक है। पत्नी के देहान्त के बाद अकेला अपने ढाई महीने के बच्चे का पालन करता है। वहीं दूसरे गांव में सुगना नाम की लड़की जिसका प्रेमी जग्गू है जो पेशे से गाइड है और उसके प्रेम में शारीरिक आकर्षण मात्र है। हालातों के चलते सुगना की शादी रामकिशन से हो जाती है पर वो जग्गू के साथ के अपने प्रेम को भूल नहीं पाती और रामकिशन के बच्चे को स्वीकारने से इंकार कर देती है, परंतु रामकिशन का धीर, गम्भीर और मृदुल हृदय सुगना के अंतर्मन में परिवर्तन लाता है। वहीं सुगना प्रेम के उस यथार्थ तक पहुंचती है और अनुभूत करती है कि स्त्री केवल भौतिक देह ही नहीं वरन ममत्व से भरी मां है। नाटक कठपुतलियां मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी कठपुतलियां से प्रेरित है जिसके नाट्य रूपांतरण के दौरान एवं निर्देशकीय दृष्टि से कुछ मूल परिवर्तन किए गए हैं। स्त्री और पुरुष की प्राकृतिक सांस्कृतिकता के मूल तत्वों की संवेदना को उकेरने, तलाशने का प्रयत्न है नाटक कठपुतलियां। एक स्त्री के मातृत्व भाव की नैसर्गिक मौजूदगी के उपरांत तथाकथित बदलते परिवेश में इस महत्वपूर्ण प्रकृति प्रदत्त भाव के क्षीण होते विचारों की पुनः व्याख्या की आवश्यकता इस आत्मकेंद्रित और भौतिक परिवेश में कितनी ज़रूरी है, यह नाटक यही रेखांकित करने का प्रयास करता है। इसकी रचना प्रक्रिया सहज और स्वाभाविक रखने की भी चेष्टा की गयी है। अधिकतर नितान्त नये अभिनयकर्मियों के साथ मिलकर बनी यह नाट्य प्रस्तुति राजस्थान की मेवाड़ी बोली, आंचलिक गीतों एवं संगीत के ज़रिए वातावरण को वास्तविकता की प्रतीति के रूप में संयोजित करती है। मंच पर कुलदीप सिंह, शिवांगी बैरवा, दुष्यंत हरित व्यास, गरिमा सिंह, दीपक, अंजु जोशी, हरि सिंह, जगदीश प्रसाद, प्रभु प्रजापत, विभूति चौधरी, अंकित शाह, दिनेश चौधरी, राहुल लौहार, महेश प्रजापत, अनिमेष आचार्य, गरिमा पंचोली, अंशु, पूजा गुर्जर उपस्थित रहे। रसधारा सांस्कृतिक संस्थान द्वारा प्रस्तुति दी गई, जिसका संचालन रंगकर्मी राहुल बोड़ा ने किया। नाट्य रूपांतरण व निर्देशन अनुराग सिंह राठौड़, मंच सज्जा व मंच सामग्री हर्षित वैष्णव, के जी कदम, प्रकाश व्यवस्था रवि ओझा, संगीत हितेश नलवाया, रवि यादव, ढोलक महेश प्रजापत, संगीत संचालन, निर्देशन, अनुराग सिंह, मार्गदर्शन गोपाल आचार्य द्वारा किया गया।

