सचिन पायलट का भजनलाल सरकार पर हमला,जातिगत जनगणना और भर्ती घोटाले पर उठाए सवाल

Jodhpur Politics Rajasthan

जोधपुर:-राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखा हमला बोला है। रविवार को पाली में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पायलट ने जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में जातिगत जनगणना, भर्ती घोटाले और ईडी की कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा।

“समय पर शुरू हो जातिगत जनगणना”
पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना की घोषणा कांग्रेस के दबाव में करनी पड़ी। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और कांग्रेस लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास रहेगा कि जनगणना केवल घोषणा बनकर न रहे, इसे समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए, ताकि नीति निर्धारण में इसका सही उपयोग हो सके।”

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले इस मांग का मजाक उड़ाया जाता था और राहुल गांधी को “अर्बन नक्सल” तक कहा गया। अब सरकार को खुद इसकी स्वीकृति देनी पड़ी है।

“राज्य में सरकार नहीं, नौकरशाही चला रही है शासन”
राजस्थान में भर्ती घोटाले पर बोलते हुए पायलट ने कहा कि मंत्री केके विश्नोई पर आरोप लगने के बाद भी सरकार कोई जवाब नहीं दे रही। उन्होंने कहा, “यहां हालत यह है कि सरकार सफाई देने को तैयार नहीं है, मंत्री और विधायक खुद को अनसुना महसूस कर रहे हैं। सवा साल में सरकार की कार्यशैली स्पष्ट होनी चाहिए थी, लेकिन यहां सत्ता के कई केंद्र बन गए हैं।”

उन्होंने कहा कि भर्ती घोटाले में कमेटी की सिफारिश और अदालत के निर्देशों के बावजूद सरकार कार्रवाई से बच रही है। पायलट ने एक बार फिर आरपीएससी को भंग करने की मांग दोहराई, यह कहते हुए कि वहां पारदर्शिता का अभाव है।

“ईडी पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने का आरोप”
जल जीवन मिशन से जुड़ी जांच और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के नेताओं पर ईडी की कार्रवाई को लेकर पायलट ने कहा कि जांच एजेंसी भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट खुद कह चुका है कि ईडी जिन मामलों में गिरफ्तारी करती है, उनमें से एक फीसदी मामलों में भी सजा नहीं होती। इससे साफ है कि एजेंसियां राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल हो रही हैं।”

सचिन पायलट के इस बयान को राजस्थान की सियासत में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और विपक्ष की सरकार पर हमले की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।