भारत सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि भविष्य में होने वाला हर आतंकी हमला भारत के खिलाफ युद्ध के रूप में माना जाएगा, और भारतीय सेना इसका जवाब उसी अंदाज में देगी। यह जानकारी न्यूज एजेंसी ने सरकार के शीर्ष सूत्रों के हवाले से दी है।
यह फैसला 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश पर्यटक शामिल थे। यह हमले पाकिस्तान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच हुआ था।
भारत में ‘एक्ट ऑफ वॉर’ कैसे निर्धारित होता है?
भारत में ‘एक्ट ऑफ वॉर’ कोई एक कानून नहीं है, बल्कि यह संविधान, भारतीय दंड संहिता (IPC), रक्षा कानून और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत निर्धारित होता है। किसी भी कार्रवाई को ‘एक्ट ऑफ वॉर’ घोषित करने का अधिकार केवल भारत सरकार को है, और यह तब किया जाता है जब भारत की संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता पर हमला होता है।
इसके अलावा ‘डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट’ भी मौजूद है, जिसका इस्तेमाल युद्ध या युद्ध जैसे खतरे के दौरान नागरिकों की स्वतंत्रता और संपत्ति पर नियंत्रण रखने के लिए किया जा सकता है, जैसा कि 1962 में भारत-चीन युद्ध और 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान किया गया था।
ये कानून भारतीय संविधान के तहत आपातकालीन अधिकारों को और मजबूत करने के लिए संसद द्वारा बनाए गए थे, हालांकि दोनों अब निरस्त हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ‘एक्ट ऑफ वॉर’
भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सदस्य है, और इसलिए उसे यूएन चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त है। इसके तहत भारत युद्ध को केवल अपनी रक्षा के लिए या UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) की अनुमति से ही सही ठहरा सकता है।

