भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार शाम 5 बजे से लागू सीजफायर को महज तीन घंटे भी नहीं हुए थे कि पाकिस्तान ने एक बार फिर इसका उल्लंघन कर दिया। जम्मू-कश्मीर के नगरोटा स्थित सैन्य ठिकाने पर आतंकियों ने हमला कर दिया। यह बेस 166 फील्ड रेजिमेंट यूनिट का हिस्सा है। हमले में नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
रात 8 बजे के बाद पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों — अखनूर, पुंछ, नौशेरा, श्रीनगर, आरएसपुरा, सांबा, उधमपुर — में फायरिंग की गई। राजौरी में मोर्टार शेलिंग की गई, जबकि उधमपुर में ड्रोन हमले की भी पुष्टि हुई है।
स्थिति को देखते हुए जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पंजाब और गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में फिर से ब्लैकआउट लागू कर दिया गया है। इन इलाकों की बिजली काट दी गई है और लोगों से घरों में ही रहने की अपील की गई है।
सीजफायर के बावजूद भारी नुकसान
22 अप्रैल से 10 मई के बीच पाकिस्तान की गोलीबारी में अब तक 4 भारतीय जवान शहीद हो चुके हैं और 60 से अधिक घायल हैं। इसके अलावा 17 नागरिकों की जान गई है और दर्जनों घायल हैं। राजौरी के अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त डॉ. राज कुमार थापा भी गोलीबारी में घायल हुए थे और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाते हुए कहा, “ये कैसा सीजफायर है, जब श्रीनगर में धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।”
अमेरिका की मध्यस्थता में बनी थी सहमति
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी कि दोनों देशों के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में सीजफायर पर सहमति बनी है। ट्रंप ने दोनों पक्षों को ‘समझदारी भरा कदम’ उठाने के लिए बधाई दी थी।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ट्रंप के बयान के लगभग 30 मिनट बाद मीडिया को जानकारी दी कि दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बातचीत में जमीन, हवा और समुद्र में सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति बनी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री की कूटनीतिक पहल
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत और पाकिस्तान दोनों के नेताओं से बातचीत की। उन्होंने भारत से संयम बरतने और पाकिस्तान से जांच में सहयोग करने की अपील की। अमेरिका ने आतंकवाद की निंदा की, लेकिन साथ ही भारत से भी प्रतिक्रिया में संतुलन रखने को कहा।
निष्कर्ष
सीजफायर की घोषणा के बावजूद जमीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच मध्यस्थता और कूटनीतिक संवाद तो चल रहे हैं, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा और सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात अब भी गंभीर हैं।

