अखिलेश यादव की संसद के पास मस्जिद में मौजूदगी पर सियासी घमासान,बीजेपी ने बताया ‘नमाजवादी’,सपा ने दिया करारा जवाब

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उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच मंगलवार को नई सियासी जंग छिड़ गई जब संसद के पास स्थित एक मस्जिद में अखिलेश की मौजूदगी पर विवाद खड़ा हो गया।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश को ‘नमाजवादी’ कह दिया और आरोप लगाया कि सपा नेता बार-बार संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “संविधान साफ कहता है कि धर्म का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा, लेकिन अखिलेश यादव लगातार इसका उल्लंघन करते रहे हैं। उन्हें संविधान में कोई आस्था नहीं है।”

अखिलेश का पलटवार

इन आरोपों पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा, “आस्था जोड़ने का काम करती है और हम जोड़ने के साथ हैं। भाजपा चाहती है कि लोग न जुड़ें, दूरियां बनी रहें। हम सभी धर्मों में आस्था रखते हैं, लेकिन भाजपा का एकमात्र हथियार धर्म है।”

क्या है पूरा मामला?

मंगलवार को जब संसद की कार्यवाही स्थगित हुई, तब अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ बैठे थे। उसी दौरान रामपुर से सांसद मोहिबुल्ला नदवी ने पास की मस्जिद के बारे में जानकारी दी, जहां वे इमाम हैं। अखिलेश ने मस्जिद की दूरी पूछी और कार्यवाही स्थगित होने के चलते अपने सांसदों के साथ वहां चले गए।

कुछ समय के लिए सभी नेता वहां रुके और इसकी तस्वीरें सांसद धर्मेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर साझा कर दीं, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस में तब्दील हो गया।

मस्जिद को लेकर भी उठे सवाल

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि मस्जिद का राजनीतिक इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने दिल्ली की मंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली वक्फ बोर्ड से मांग की है कि मोहिबुल्ला नदवी को इमाम के पद से हटाया जाए

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और सत्ता व विपक्ष के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनातनी बनी हुई है।