प्रदेशभर में 17 से 30 नवम्बर तक संचालित होगा एफसीएम पिंक ड्राइव पखवाड़ा

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जयपुर, 29 अक्टूबर। एनीमिया नियंत्रण एवं उपचार के उद्देश्य से प्रदेशभर में 17 से 30 नवम्बर तक एफसीएम पिंक ड्राइव पखवाड़ा संचालित किया जाएगा। इसकी तैयारियों को लेकर चिकित्सा, स्वास्थ्य विभाग द्वारा डवलपमेंट पार्टनर जपाईगो के सहयोग से बुधवार को गर्भवती महिलाओं में एऩीमिया प्रबंधन हेतु फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) के उपयोग विषय पर राज्य-स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में प्रदेशभर के जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों, स्त्री रोग विशेषज्ञों एवं अऩ्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों सहित डवलपमेंट पार्टनर्स के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मिशन निदेशक, एनएचएम डॉ. अमित यादव ने प्रदेशभर में संचालित होने वाले एफसीएम पिंक ड्राइव पखवाड़ा, एफ़.सी.एम. दिशा-निर्देशिका एवं सेवा प्रदाताओं के लिए सही खुराक की गणना हेतु पोस्टर और डिजिटल एप्लिकेशन (गर्भ सूत्र एप्लिकेशन) का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने ई-लर्निंग मॉड्यूल्स और पीसीटीएस –एएनसी डिजिटल एऩेलिटिकल डैशबोर्ड्स का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि ये डिजिटल नवाचार सेवा प्रदाताओं की क्षमता-वृद्धि, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, और डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में निरंतर कमी लाने हेतु साक्ष्य-आधारित रणनीतियों और प्रणाली सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर ने कहा कि एफसीएम आयरन इंजेक्शन, जिसे फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ इंजेक्शन (जैसे ओरोफेर एफसीएम) कहा जाता है, आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया के इलाज के लिए दिया जाता है। फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ शरीर को आयरन देता है, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण और हीमोग्लोबिन बढ़ता है, यह शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए जरूरी होता है।

परियोजना निदेशक मातृत्व स्वास्थ्य डॉ. तरुण चौधरी ने प्रजेंटेशन के माध्यम से एफसीएम के उपयोग, दिशा-निर्देश के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में तकनीकी सत्रों एवं जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन वाले वाले अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। साथ ही सुरक्षा प्रोटोकॉल, सेवा प्रदायन प्रणाली तथा डेटा अभिलेखन और रिपोर्टिंग मानकों पर चर्चा की गई। इन विचार-विमर्शों ने एनीमिया प्रबंधन में गुणवत्ता, सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान की प्रतिबद्धता को और सशक्त किया।

जपाईगो के डॉ. कमलेश लालचंदानी, डॉ. यशपाल जैन ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य एवं जिला स्तर की रणनीतियों को संरेखित करने हेतु एक प्रभावी मंच के रूप में कार्य कर रहा है ताकि FCM का सदुपयोग कर मातृ स्वास्थ्य सुधार के लिए एक गेम-चेंजिंग गतिविधि के रूप में लागू किया जा सके।