नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों के विमोचन कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था लगातार मजबूत हुई है और सत्ता परिवर्तन से लेकर बड़े बदलाव तक बिना हिंसा के स्वीकार किए गए हैं।
अमित शाह ने कहा कि 76 दशकों में भारतीय संविधान और बहुदलीय संसदीय व्यवस्था ने लोकतंत्र की जड़ों को “गहराई” दी है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं के माध्यम से हुए सांसदों को देश ने सुखद तरीकों से स्वीकार किया, जो दुनिया के लिए एक उदाहरण है।
कार्यक्रम में तुषार मेहता की दो पुस्तकें — The Bench, the Bar, & the Bizarre and The Lawful and the Awful — लॉन्च की गईं। अमित शाह ने कहा कि इन पुस्तकों में न्याय व्यवस्था पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के संभावित प्रभाव और कैंची को विस्तार से विनियमित करने की कोशिश की गई है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना तय है और न्यायपालिका को उससे जुड़ी कैंची के लिए तैयार रहना होगा। शाह ने तुषार मेहता की “जिज्ञासु सोच” की सराहना करते हुए कहा कि किताबें भविष्य की न्यायिक जबड़े को समझने का प्रयास करती हैं।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि तुषार मेहता द्वारा अपनी पुस्तक अपनी मां को समर्पित करना और मदर्स डे के दिन उसका विमोचन करना “प्रतिकात्मक और सुंदर” कदम है। उन्होंने कहा, “भारत में तो हर दिन मदर्स डे होता है।”

