टी.आर सैनी ( नैनवां – बून्दी )
नैनवां, 19 जून। शहरों के साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। शोक की घड़ी में भी मानव सेवा का संदेश देते हुए नैनवां के एक परिवार ने दिवंगत माता के नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
वार्ड संख्या 4, सदर बाजार निवासी स्वर्गीय कमल कुमार मारवाड़ा की धर्मपत्नी एवं विनोद, सुनील, संजय तथा मुकेश मारवाड़ा की माताजी राजकुमारी मारवाड़ा का जयपुर उपचार के लिए ले जाते समय चाकसू के निकट निधन हो गया। माताजी के निधन की सूचना मिलते ही पुत्र विनोद मारवाड़ा ने सबसे पहले शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं ईबीएसआर-बीबीजे चैप्टर के समन्वयक डॉ. कुलवंत गौड़ से संपर्क कर नेत्रदान की इच्छा जताई।
संयोग से डॉ. गौड़ उस समय बारां में एक नेत्रदानी की शोकसभा में नेत्रदान एवं अंगदान विषय पर जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर लौट रहे थे। सूचना मिलते ही वे नेत्र संकलन वाहिनी ‘ज्योति रथ’ के साथ नैनवां पहुंचे और आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर नेत्रदान संपन्न कराया।
मारवाड़ा परिवार लंबे समय से शाइन इंडिया फाउंडेशन से जुड़ा हुआ है। इससे पूर्व चार वर्ष पहले राजकुमारी मारवाड़ा के पति स्वर्गीय कमल कुमार मारवाड़ा तथा दो वर्ष पूर्व उनकी भतीजा बहू स्वर्गीय हेमलता जैन का नेत्रदान भी संस्था के सहयोग से कराया गया था।
धर्म-कर्म एवं साधु-संतों की सेवा में सदैव अग्रणी रहने वाली राजकुमारी मारवाड़ा के अचानक निधन से परिवार को गहरा आघात पहुंचा, लेकिन परिजनों को इस बात का संतोष है कि उनके नेत्र किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी बनकर हमेशा जीवित रहेंगे।
संस्था के ज्योति मित्र महावीर जैन मोदीका ने बताया कि नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता के परिणामस्वरूप पिछले छह वर्षों में नैनवां क्षेत्र से 15 दिवंगत व्यक्तियों के नेत्रदान प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह समाज में बढ़ती संवेदनशीलता और मानव सेवा की भावना का सकारात्मक संकेत है ।

