लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर ओम बिरला का नमन,प्रतिनिधियों से आदर्शों को समर्पण की अपील

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आगरा, 30 जून, 2026: लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज आगरा में आयोजित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और सहभागितापूर्ण, जवाबदेह एवं न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था का आह्वान किया।

बिरला ने कहा कि व्यक्तिगत जीवन में असाधारण कठिनाइयों एवं पारिवारिक विपत्तियों का सामना करने के बावजूद लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने न्याय, संवेदनशीलता और जनकल्याण पर आधारित आदर्श शासन व्यवस्था स्थापित की। तीन शताब्दियों के उपरांत भी उनकी प्रशासनिक दूरदृष्टि तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सुशासन के सिद्धांतों को निरंतर प्रेरित करती है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में लोक सभा अध्यक्ष ने सभी नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन से प्रेरणा लेकर जनभागीदारी एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के कार्य में स्वयं को समर्पित करें। उन्होंने सभी से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने हेतु शासन-प्रशासन में जवाबदेही, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और न्याय के मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने समाज के दुःख-दर्द को दूर करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने उनके त्याग की भावना की तुलना भगवान शिव से करते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान शिव ने लोककल्याण के लिए विषपान किया, उसी प्रकार लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने समाज के कष्टों को अपना मानकर जनसेवा का मार्ग अपनाया। उन्होंने कहा कि उनका शासन सत्य, न्याय, करुणा, धर्म तथा सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित था।

भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण में उनके अमूल्य योगदान का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने देश के विभिन्न भागों में अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण कर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नेतृत्व किया। उनकी शासन-दृष्टि इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि संवेदनशीलता, जवाबदेही और न्यायपूर्ण नीतियों के माध्यम से शासन किस प्रकार सामान्य नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई किसी एक समाज या वर्ग की नहीं थीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की लोकमाता थीं, जिन्होंने जनकल्याण के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के कारण जन-जन के हृदय में सम्मान का स्थान प्राप्त किया।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन और उनके आदर्श आज भी सार्वजनिक जीवन से जुड़े सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को अपने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में निष्पक्षता, न्यायप्रियता, समावेशिता और उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों की प्रेरणा उनके जीवन से ग्रहण करनी चाहिए।

लोक सभा अध्यक्ष ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को शाश्वत प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि त्याग, सेवा, करुणा और आध्यात्मिक समर्पण से परिपूर्ण उनका जीवन न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के आदर्श आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करते रहेंगे तथा शासन सदैव जन-केंद्रित, उत्तरदायी और प्रत्येक नागरिक को न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।