जोधपुर/ नई दिल्ली, 30 जून। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के लिए पर्यटन का अर्थ केवल घूमना- फिरना नहीं, अपितु बेमिसाल अनुभव, रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पहले पर्यटन को इस व्यापक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाता था, लेकिन आज इसे भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण इंजन बनाया गया है।
मंगलवार को शेखावत ने राष्ट्रीय कार्यशाला में नीति आयोग एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार रिपोर्ट “गैर-वित्तीय नियामक सुधारों के माध्यम से पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास को गति देना” का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर पर्यटन अब केवल अवकाश का माध्यम नहीं, अपितु रोजगार, निवेश, आधारभूत ढांचे के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समावेशी आर्थिक प्रगति का सबसे प्रभावी क्षेत्र बन चुका है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत को प्रकृति और संस्कृति दोनों का अनुपम वरदान प्राप्त है। दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक, विविध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्मारक, जीवंत त्योहार एवं परंपराएं, आस्था के पवित्र केंद्र, समृद्ध जैव-विविधता, हिमालय की भव्य पर्वत श्रृंखलाएं, विस्तृत समुद्री तट और तेजी से विकसित हो रहा आधुनिक आधारभूत ढांचा भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज पर्यटन भारतीय अर्थव्यवस्था में 19 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दे रहा है तथा 4.3 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करा रहा है। यह देश के सबसे बड़े सेवा क्षेत्रों में शामिल है, जिसका आतिथ्य, परिवहन, हस्तशिल्प, खाद्य सेवाओं, वेलनेस, मनोरंजन और हजारों स्थानीय उद्यमों से सीधा जुड़ाव है।
शेखावत ने कहा कि भारत में घरेलू पर्यटन की बढ़ती ताकत भी अत्यंत उत्साहजनक है। वर्ष 2024 में 250 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं, जबकि 90 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक भारत आए। उन्होंने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं हैं, अपितु करोड़ों परिवारों की आजीविका, हजारों उद्यमियों के सपनों और देश के संतुलित क्षेत्रीय विकास की सशक्त कहानी हैं।
शेखावत ने कहा कि किसी पर्यटन स्थल पर पहुंचने वाला प्रत्येक पर्यटक केवल होटल या एयरलाइन उद्योग को ही लाभ नहीं पहुंचाता, बल्कि टैक्सी चालकों, स्थानीय गाइडों, कारीगरों, रेस्तरां संचालकों, होमस्टे संचालकों, स्वयं सहायता समूहों, कलाकारों, फोटोग्राफरों, सड़क किनारे छोटे व्यापारियों और असंख्य लघु उद्यमियों की आय का भी आधार बनता है। यही पर्यटन की वास्तविक शक्ति है, जो विकास और समृद्धि का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाती है।
केंद्रीय मंत्री कहा कि पर्यटन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, अपितु सामाजिक सशक्तीकरण और समावेशी विकास का प्रभावी माध्यम भी है। आज जारी की गई रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि पर्यटन क्षेत्र में किए जाने वाले नियामकीय सुधार केवल प्रक्रियागत बदलाव नहीं हैं, अपितु रोजगार, आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले परिवर्तन हैं।
शेखावत ने कहा कि जब कोई नया होटल स्थापित होता है, किसी विरासत स्थल का संरक्षण एवं पुनरुद्धार किया जाता है, कोई होमस्टे शुरू होता है अथवा नया पर्यटन गंतव्य विकसित होता है, तो पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। पर्यटन महिलाओं, युवाओं, कारीगरों, जनजातीय समुदायों, पारंपरिक कलाकारों, स्थानीय उद्यमियों तथा पहली पीढ़ी के व्यवसायियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलता है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से दूरस्थ और आकांक्षी जिलों में, जहां औद्योगिक विकास की संभावनाएं सीमित होती हैं, वहां पर्यटन संतुलित क्षेत्रीय विकास का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। इसी कारण पर्यटन क्षेत्र को सशक्त बनाना ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को गति देने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। शेखावत ने विश्वास व्यक्त किया कि नीति आयोग और पर्यटन मंत्रालय की यह संयुक्त रिपोर्ट देश के पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में सुधारों को नई दिशा देगी तथा भारत को वैश्विक पर्यटन महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

