महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा परियोजनाओं से जुड़े लंबे समय से अनुदान भुगतान विवाद का समाधान हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मंजूरी में चारों राज्यों ने एकमुश्त भुगतान (वन-टाइम सेटलमेंट) के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शामिल हुए। इस दौरान नर्मदा परियोजनाओं से जुड़े अंतरराज्यीय मुद्दों और उनके उद्देश्यों में तेजी से लाने पर भी चर्चा हुई।
केंद्र सरकार के अनुसार, यह समझौता सरदार सरोवर परियोजना की लागत साझेदारी और अनुदान देयों से जुड़े दशकों पुराने विवाद को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत चारों राज्यों के बीच अनुदान भुगतान का अंतिम समाधान एकमुश्त समझौते के जरिए किया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा और सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के बीच लंबे समय से आंदोलनों जल विवादों को बातचीत और सहमति के जरिए सुलझाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजना से मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को सिंचाई, परियोजनाओं और बिजली के क्षेत्र में लाभ मिला है। राजस्थान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों तक नर्मदा का पानी पहुंचा, वहां कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था में बदलाव देखने को मिला।
अमित शाह ने हाल के दशकों में हरियाणा-राजस्थान जल समझौते और किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े आंदोलनों का भी उल्लेख करते हुए उनको सहकारी संघवाद के उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का उपयोग चाहे किसी भी राज्य में हो, उसका लाभ अंततः देश के नागरिकों को ही मिलता है।
इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी दिल्ली दौरे में कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर राज्य से जुड़े विभिन्न विकास और आधारभूत ढांचे के मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने नर्मदा परियोजनाओं से जुड़े मामलों के साथ-साथ रेल, कृषि, जल संसाधन और अन्य अंतरराज्यीय परियोजनाओं पर भी केंद्र से सहयोग की अपेक्षा बताई।

