नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कहा कि उनका जाना तय था और इसे छात्रों के आंदोलन की जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधान के कार्यकाल में देश की शिक्षा व्यवस्था कमजोर हुई और अब सरकार को व्यापक शिक्षा सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन के समर्थन का दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस युवाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीधे जिम्मेदार हैं और इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। उनका कहना था कि देश के युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ा है और उसका निजीकरण किया जा रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं—धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना, प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री से माफी। उन्होंने कहा कि इन मांगों पर कोई समझौता नहीं होगा।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि हालिया छात्र आंदोलन केवल परीक्षा संबंधी विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े व्यापक मुद्दों की ओर संकेत करता है। उनके अनुसार, यदि इन चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में असंतोष और बढ़ सकता है।

