बेंगलुरु की एक स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को एक घरेलू सहायिका से बलात्कार के मामले में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है, साथ ही पीड़िता को ₹7 लाख मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें दोषी ठहराया था। सजा सुनाए जाने से पहले रेवन्ना ने खुद को निर्दोष बताते हुए कोर्ट से नरमी की अपील की थी।
2021 से यौन शोषण का आरोप
यह मामला रेवन्ना के परिवार के फार्महाउस में काम करने वाली 47 वर्षीय महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि 2021 से कई बार उनके साथ बलात्कार किया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि रेवन्ना ने घटना का वीडियो लीक करने की धमकी दी थी।
रेवन्ना पर बलात्कार, आपराधिक धमकी, अश्लील वीडियो लीक और ताक-झांक समेत कई धाराओं में केस दर्ज हुआ था। यह पहला मामला है जिसमें उन्हें सजा मिली है। उनके खिलाफ अब तक चार आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।
सेक्स स्कैंडल में फंसे, JDS से निलंबन
प्रज्वल रेवन्ना का नाम पिछले साल कर्नाटक सेक्स स्कैंडल में सामने आया था, जिसमें उन पर 50 से अधिक महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। सोशल मीडिया पर उनके 2,000 से ज्यादा अश्लील वीडियो वायरल हुए थे। इसके बाद जनता दल (सेक्युलर) ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था।
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हासन सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।
देश छोड़कर भागे, एयरपोर्ट से गिरफ्तारी
चुनाव के ठीक बाद, 27 अप्रैल को रेवन्ना देश छोड़कर जर्मनी चले गए थे और करीब 35 दिन तक लापता रहे। 31 मई को जब वे भारत लौटे, तो बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इससे पहले 27 मई को उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि वे 31 मई को SIT के सामने पेश होंगे। उन्होंने सभी आरोपों को झूठा बताया था।
देवगौड़ा की सार्वजनिक चेतावनी
पूर्व प्रधानमंत्री और रेवन्ना के दादा एचडी देवगौड़ा ने 23 मई को सार्वजनिक तौर पर प्रज्वल को भारत लौटने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि परिवार मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन अगर प्रज्वल लौटकर जांच का सामना नहीं करता, तो वह उनके और परिवार के गुस्से का शिकार बनेगा।
सार्वजनिक माफी
प्रज्वल ने एक वीडियो में अपने माता-पिता, दादा और पार्टी कार्यकर्ताओं से माफी मांगी थी। उन्होंने दावा किया था कि उनकी विदेश यात्रा पहले से तय थी और उन्हें SIT की कार्रवाई की जानकारी बाद में मिली।
कोर्ट का यह फैसला कर्नाटक में यौन उत्पीड़न के मामलों में न्यायिक कार्रवाई की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

