BRICS अध्यक्षता के तहत भारत की सक्रियता तेज,सितंबर शिखर सम्मेलन से पहले अहम बैठकों का दौर शुरू

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रिपोर्ट: हर्षित नागदा

नई दिल्ली: BRICS की अध्यक्षता संभालने के बाद भारत ने सितंबर में प्रस्तावित शिखर सम्मेलन की तैयारियां तेज कर दी हैं। अगस्त की शुरुआत से ही सदस्य देशों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की कई महत्वपूर्ण बैठकों का सिलसिला शुरू हो रहा है, जिनमें आर्थिक सहयोग, व्यापार, डिजिटल नवाचार, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार की जाएगी।

भारत इस बार BRICS को केवल आर्थिक सहयोग के मंच तक सीमित रखने के बजाय विकासशील देशों की सामूहिक आवाज़ के रूप में और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। सरकार का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

भारत की प्राथमिकताओं में सदस्य देशों के बीच व्यापार को सरल बनाना, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन को बढ़ावा देना, डिजिटल भुगतान प्रणालियों में सहयोग, स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहन तथा हरित ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करना शामिल है। खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन जैसे विषय भी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं।

भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को भी प्रमुखता से उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावी ढंग से रखा जा सकेगा और भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका भी मजबूत होगी।

अगस्त के दौरान विदेश, वित्त, व्यापार, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों में विभिन्न प्रस्तावों पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। इन बैठकों में तैयार किए गए मसौदों को सितंबर में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए केवल एक कूटनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। यदि भारत सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति बनाने में सफल रहता है, तो इसका असर वैश्विक आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।

भारत की बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत मानी जा रही है कि वह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।