राजस्थान निकाय चुनाव:बीजेपी ने शुरू की प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी की तैयारी,कांग्रेस भी सक्रिय

Jaipur Rajasthan

राजस्थान में निकाय चुनाव के लिए मतदान पूरा होने के बाद अब राजनीतिक दलों का ध्यान संभावित नतीजों और बोर्ड बनाने के लिए जरूरी समीकरणों पर है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए तैयारी शुरू कर दी है, जबकि कांग्रेस भी इस मुद्दे पर रणनीति बना रही है।

बीजेपी की ओर से प्रत्याशियों को फोन कर प्रशिक्षण शिविर की जानकारी दी जा रही है। पार्टी ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को 12 सितंबर दोपहर 12 बजे प्रदेश बीजेपी मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा है। इसके बाद उन्हें अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की जा रही है।

नतीजों से पहले प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद

निकाय चुनाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं और कौन सा दल नगर निकायों में बोर्ड बनाने की स्थिति में पहुंचता है।

कई निकायों में मुकाबला करीबी रहने की संभावना है। ऐसे में एक-एक पार्षद का समर्थन बोर्ड बनाने के लिए अहम हो सकता है। पार्टियों को आशंका है कि नतीजे आने के बाद दूसरे दल संभावित विजेता पार्षदों से संपर्क कर सकते हैं।

इसी वजह से राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों को नतीजों से पहले ही एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।

बीजेपी ने ‘प्रशिक्षण शिविर’ के नाम पर बुलाई बैठक

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी जयपुर के अलावा उदयपुर समेत दूसरे जिलों में भी प्रत्याशियों को प्रशिक्षण शिविर के लिए एक जगह जुटाने की तैयारी कर रही है।

पार्टी की कोशिश है कि मतगणना तक प्रत्याशियों के संपर्क में रहा जाए और नतीजों के बाद बोर्ड बनाने के लिए अगर किसी तरह के राजनीतिक समीकरण की जरूरत पड़े तो पार्षदों को एकजुट रखा जा सके।

कांग्रेस में भी मंथन, अभी अंतिम फैसला नहीं

बीजेपी की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने भी अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों को लेकर रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि पार्टी की ओर से बाड़ेबंदी को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

खास तौर पर उन निकायों पर दोनों दलों की नजर रहेगी, जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर कम रहने की संभावना है।

निर्दलीय प्रत्याशी बन सकते हैं ‘गेम चेंजर’

अगर किसी नगर निकाय में बीजेपी या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो निर्दलीय पार्षद बोर्ड बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

इसी वजह से दोनों प्रमुख दलों की नजर मजबूत निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी है। चुनाव परिणाम आने के बाद इनके समर्थन से स्थानीय राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

14 सितंबर को खुलेगा चुनावी पिटारा

राजस्थान निकाय चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को होगी। इसी दिन यह साफ होगा कि किस दल को कितनी सीटें मिलीं, कहां बहुमत का आंकड़ा हासिल हुआ और किन निकायों में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा।