पीयूष गोयल का राहुल गांधी पर हमला,बोले- ‘कांग्रेस ने चुनाव आयुक्तों को मंत्री और राज्यपाल बनाया,अब आयोग पर सवाल उठा रही है’

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नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस के सवालों पर पलटवार करते हुए पार्टी के पुराने फैसलों का हवाला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव अधिकारियों को राजनीतिक पद दिए गए और सम्मानित किया गया। गोयल ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा रेड फ्लैग’ बताते हुए उनसे वोट चोरी के आरोपों के समर्थन में सबूत देने की चुनौती दी।

मंगलवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग पर सवाल उठाते समय अपने पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन, एमएस गिल, आरके त्रिवेदी और नवीन चावला का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पद दिए।

टीएन शेषन और एमएस गिल का नाम लेकर कांग्रेस पर सवाल

पीयूष गोयल ने कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ गांधीनगर से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, शेषन यह चुनाव हार गए थे।

गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल को पद पर रहते हुए पद्म विभूषण दिए जाने और बाद में कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिहाज से अनुचित बताते हुए आरोप लगाया कि ऐसे फैसले संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।

उन्होंने आरके त्रिवेदी की गुजरात के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति और नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए जाने का भी उल्लेख किया। गोयल ने कहा कि कांग्रेस के इन पुराने फैसलों को देखते हुए पार्टी को मौजूदा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से पहले अपने रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए।

ये आरोप गोयल ने राजनीतिक बयानबाजी के दौरान लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया।

राहुल गांधी से वोट चोरी के आरोपों पर हलफनामा देने की चुनौती

गोयल ने राहुल गांधी से चुनावों में कथित वोट चोरी के आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने और चुनाव आयोग के सामने हलफनामा दाखिल करने को कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस के पास चुनावी गड़बड़ियों के प्रमाण हैं, तो पार्टी उन्हें औपचारिक रूप से आयोग के सामने क्यों नहीं रखती।

उन्होंने बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। गोयल ने पूछा कि यदि पार्टी को मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर आपत्ति थी, तो उसने उस समय विरोध क्यों नहीं किया। उन्होंने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों को लेकर भी कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए।

गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर चुनाव प्रक्रिया की तारीफ करती है, लेकिन हारने पर उसी व्यवस्था पर सवाल उठाती है। उन्होंने शशि थरूर, रमेश चेन्निथला और अधीर रंजन चौधरी सहित कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए पार्टी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

‘राहुल गांधी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा रेड फ्लैग’

गोयल ने राहुल गांधी पर लगातार चुनावी हार के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाने के बजाय अपने दावों के समर्थन में तथ्य पेश करने चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके साथियों ने प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया। गोयल के मुताबिक, पत्रकार तीन महीने की गर्भवती थीं और प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। इस आरोप पर भी कांग्रेस की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

SIR विवाद के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव

पीयूष गोयल के बयान ऐसे समय आए हैं, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच विवाद तेज है।

सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इसके बाद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं ने SIR से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में प्रक्रियागत खामियां बताई हैं। इन खामियों के कारण याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस के पुराने फैसलों और चुनावी प्रदर्शन को लेकर पलटवार कर रही है।

इस तरह चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जारी विवाद अब कांग्रेस के पुराने फैसलों, पूर्व चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों और राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों तक पहुंच गया है।