संस्कृति संरक्षण से ही संभव ‘विकसित भारत’:उत्तराखंड महोत्सव में केंद्रीय मंत्री शेखावत का संबोधन;कहा—नई पीढ़ी को सनातन परंपरा से जोड़ना अनिवार्य

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लखनऊ, 16 नवंबर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने रविवार को उत्तराखंड महोत्सव में अपने उद्बोधन में देवभूमि की संस्कृति और अवध की तहजीब के संगम पर बल दिया। उन्होंने उत्तराखंड महोत्सव को केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा और लोकानुभूति को लखनऊ की धरती पर जीवित रखने का एक जन-अनुष्ठान बताया। शेखावत ने कहा कि संस्कृति के संरक्षण से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि उत्तराखंड देश की आध्यात्मिक राजधानी है। उसकी संस्कृति में समाई ऊर्जा और मधुर लोक भाषाएं भारत की बहुविध सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करती हैं। उन्होंने झोला, छपेली, थड़िया और छोलिया जैसे लोकनृत्यों को पर्वतीय जनजीवन के संघर्ष, साहस और प्रकृति के सम्मान की गाथाएं बताया।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आई व्यापक प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सड़कों, एयरपोर्ट्स और रेलवे नेटवर्क के जाल से आज चारधाम की यात्रा सुगम हुई है। भारत की छवि विश्वभर में बदली है। उन्होंने जोर दिया कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तीसरी बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने आह्वान किया कि इस विकास यात्रा में हर नागरिक को सहभागी बनना होगा। उन्होंने कहा कि हमारी यह जो सनातन संस्कृति हजारों-हजारों सालों से निरंतर प्रवाहमान है, इसकी कोई भी छटा विलुप्त न हो पाए। इसके लिए हम सबको निरंतर अपनी आने वाली पीढ़ियों को इसके साथ जोड़े रखने की आवश्यकता है।

शेखावत ने कहा कि उत्तराखंड परिषद युवा पीढ़ी के लिए संस्कृति के अनुकूल वातावरण बनाए रखे, ताकि इस राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र संकल्प के ऐतिहासिक मिशन की निरंतरता सदैव बनी रहे। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए एक बड़ी उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यूनेस्को ने लखनऊ को ‘द सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ की सूची में विश्व की धरोहर के रूप में शामिल किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए ‘प्रोएक्टिव’ प्रयासों की सराहना की।

…मेरी प्रपितामही गई थीं गंगोत्री
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने अपने पारिवारिक इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के चार धाम सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना के स्तंभ रहे हैं। मुझे बचपन से ही मेरे परिवार में यह सुनने को मिलता रहा है कि सदियों से हमारे कुल में इन चार धामों की यात्रा करने की एक पवित्र परंपरा रही है। जब मुझे चार धाम की यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हुआ, तब मैंने गंगोत्री धाम में बही-खाते रखने वाले पुरोहित के यहां अपने परिवार का पुराना लेखा-जोखा देखा। वहां मुझे यह ज्ञात हुआ कि आज से डेढ़ सौ वर्ष से भी अधिक समय पूर्व मेरी प्रपितामही (परदादी) एक बैलगाड़ी में बैठकर अपने साथ लोगों को लेकर गंगोत्री धाम के दर्शन और स्नान के लिए गई थीं। जब वह गई और वापस आईं तो उन्हें इस यात्रा को पूरा करने में पूरे दो वर्ष का समय लगा था। यह हमारी उस आध्यात्मिक चेतना और श्रद्धा की गहराई को दर्शाता है, जो युगों-युगों से इस हिमालय में विश्राम करती है।