अमित शाह बोले—‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’: घुसपैठ, आतंकवाद और नशे के खिलाफ सख्त रणनीति पर जोर

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को अवैध घुसपैठ को देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा बताते हुए कहा कि भारत कोई “धर्मशाला” नहीं है और यहां रहने का अधिकार केवल देश के नागरिकों को है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य देश को जल्द से जल्द घुसपैठ से मुक्त करना है। उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीनों में उन्होंने सभी भूमि सीमा वाले राज्यों का दौरा किया और सीमा सुरक्षा के लिए राज्यों के साथ एक रणनीतिक दस्तावेज साझा किया है।

शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए केवल मौजूदा खतरों पर नहीं, बल्कि अगले 15 से 20 वर्षों में उभरने वाली संभावित चुनौतियों पर भी नजर रखनी होगी। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ ‘PRAHAR’ रणनीति को दस्तावेज तक सीमित न रखकर रोजमर्रा की कार्रवाई का हिस्सा बनाने और आतंक के पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर जोर दिया।

गृह मंत्री ने दावा किया कि सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के तीन प्रमुख मोर्चों—नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद—से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने इसका श्रेय राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समन्वय को दिया।

उन्होंने PFI पर कार्रवाई का जिक्र करते हुए इसे केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल का उदाहरण बताया। शाह के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच 274 भगोड़ों को विदेशों से वापस लाया गया है और राज्यों को विदेशों में मौजूद आरोपियों को कानून के दायरे में लाने के लिए लक्ष्य तय करने चाहिए।

नए कानून, AI और नशे के खिलाफ ‘तीन D’

शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले एक वर्ष में तीन नए आपराधिक कानूनों को पूरी तरह लागू करना है। उन्होंने कहा कि इससे आपराधिक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज करने और दोषसिद्धि दर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने युवा पुलिस अधिकारियों से डेटा इंटीग्रेशन, विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के जरिए अपराध के तरीकों की पहचान कर कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी तैयार करने को कहा।

नशे के खिलाफ लड़ाई में गृह मंत्री ने राज्यों से नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की। उन्होंने नशामुक्त भारत के लिए ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ यानी पहचान, नेटवर्क को बाधित करने और उसे खत्म करने की तीन-स्तरीय रणनीति अपनाने पर जोर दिया।

‘चुनौतियों को संकट बनने से पहले पहचानना होगा’

शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाते समय वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा, सप्लाई चेन में बाधा, बढ़ता कट्टरपंथ और साइबर एवं सूचना युद्ध जैसी चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य केवल मौजूदा संकटों से निपटना नहीं, बल्कि संभावित खतरों को समय रहते पहचानकर उन्हें बड़े संकट में बदलने से रोकना होना चाहिए।