16 अगस्त 2026,जयपुर. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों को लेकर गंभीर घबराहट में काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी संभावित हार से डरकर प्रशासनिक तंत्र और जिला कलेक्टरों-एसपी पर भाजपा के पक्ष में काम करने का अनुचित दबाव बना रही है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में चरमराती कानून-व्यवस्था, मंत्रियों के धरने, लोहावट हत्याकांड और आम जनता की समस्याओं के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता पर तीखा प्रहार किया।
गहलोत ने रविवार को अपने निवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि प्रदेश में स्थिति इस कदर हास्यास्पद और चिंताजनक हो चुकी है कि भाजपा सरकार के अपने मंत्री तक को जिला कलेक्टर और कमिश्नर के खिलाफ छह घंटे धरने पर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक इतिहास में ऐसा दृश्य न कभी पहले देखा गया और न ही सुना गया।
निकाय-पंचायत चुनाव से घबराई सरकार, अफसरों पर बना रही दबाव
स्थानीय चुनावों के संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा:
“सबसे बड़ी दुखद बात यह है कि सरकार स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से पूरी तरह घबराई हुई है। इनकी चुनाव कराने की मंशा ही नहीं थी। हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश को जब यह कहना पड़ा कि अगर सरकार चुनाव नहीं कराएगी तो हम कराएंगे, तब जाकर विवश होकर ये चुनाव कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पांच-पांच, सात-सात के समूहों में कलेक्टरों और एसपी को बुलाकर भाजपा को जिताने की जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। यदि मैं इतना बड़ा आरोप लगा रहा हूं, तो पूरी जिम्मेदारी और पुख्ता फीडबैक के आधार पर ही कह रहा हूं।”
लोहावट ब्लाइंड मर्डर: 16 दिन बाद भी आरोपी गिरफ्त से बाहर
लोहावट में हुए ब्लाइंड मर्डर केस पर बोलते हुए गहलोत ने कहा:
“हत्याकांड के 16 दिन बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं, जबकि प्रशासन ने पांच दिन में आरोपियों को पकड़ने का लिखित वादा किया था। जानकारी मिल रही है कि पुलिस को सुराग मिलने के बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते खुलासा नहीं किया जा रहा है। यदि किसी रसूखदार या नेताओं के रिश्तेदार का नाम छुपाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री और डीजीपी को इस पूरे मामले पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।”
वंदे मातरम् पर भाजपा-RSS को बोलने का अधिकार नहीं
राष्ट्रभक्ति के मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा:
“वंदे मातरम् पर कुछ भी बोलने का आरएसएस और भाजपा को कोई नैतिक अधिकार नहीं है। देश की आजादी की लड़ाई में इनका कोई योगदान नहीं रहा है। आजादी से पहले इन्होंने अंग्रेजों के डर से कभी ‘वंदे मातरम्’ तक नहीं गाया। जो ‘वंदे मातरम्’ देशवासियों को एकजुट करने और स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत रहा है, आज भाजपा उसी पावन गीत का इस्तेमाल समाज और देश को बांटने व तोड़ने के लिए कर रही है।”
भूख हड़ताल करने वालों से अपील: भूखे मत रहो, सरकार असंवेदनशील है
विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत युवाओं और नागरिकों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा:
“यह प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की रत्ती भर परवाह नहीं करती। मैं सभी आंदोलनकारियों से अपील करता हूं कि वे भूखे रहकर अपनी सेहत खराब न करें, बल्कि धरना और अन्य लोकतांत्रिक तरीके अपनाकर अपनी आवाज उठाएं। लोकतंत्र में सरकार का बुनियादी दायित्व संवाद करना और समाधान निकालना होता है, लेकिन वर्तमान सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।”
कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आम नागरिक आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों को स्वास्थ्य योजनाओं का समुचित लाभ न मिलने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर कर आमजन को परेशान किया जा रहा है, जिसकी जवाबदेही मौजूदा सरकार को लेनी होगी।

