पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को बंगाली प्रवासियों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चल रही चर्चा के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी भाजपा ने नारेबाजी की और टीएमसी विधायकों ने इसका विरोध किया। इसके बाद विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी ने भाजपा के चीफ व्हिप शंकर घोष को सदन से निलंबित कर दिया।
शंकर घोष जब निलंबन के बाद सदन से बाहर निकाले जा रहे थे, तो वे गिर गए। उनका यह वीडियो भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। शुभेंदु ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।
यह तीन दिन का विशेष सत्र 1 सितंबर को शुरू हुआ था, जो गुरुवार को अपने अंतिम दिन पर था। सत्र के दौरान विधानसभा में विपक्ष को सदन से बाहर करने का आदेश भी दिया गया।
ममता बनर्जी के विधानसभा में दिए गए मुख्य बिंदु:
- बंगाली प्रवासियों पर हो रहे हमलों पर भाजपा चर्चा से बच रही है क्योंकि ये घटनाएं भाजपा शासित राज्यों में हो रही हैं।
- हम किसी भाषा या समुदाय के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा बंगाली विरोधी है।
- भाजपा की तानाशाही और औपनिवेशिक मानसिकता बंगाल को अपना उपनिवेश बनाने की कोशिश है।
- भाजपा ने भारत का सम्मान विदेशी ताकतों के सामने गिरवी रख दिया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि:
पश्चिम बंगाल में अगले साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। 2021 में भाजपा पहली बार राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी थी और 2026 में टीएमसी को चुनौती देने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भाजपा टीएमसी के वोट बैंक में 4% सेंध लगा पाती है तो यह चुनाव का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
राज्य में करीब 70% हिंदू और 30% मुस्लिम आबादी है। मुस्लिम वोटों के एकजुट होने से टीएमसी मजबूत बनी है, जबकि हिंदू वोट भाजपा और टीएमसी में बंटे हुए हैं। भाजपा 2026 चुनाव से पहले हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने पर जोर दे रही है। वहीं, टीएमसी भी अपनी हिंदू विरोधी छवि से बचने के लिए रामनवमी रैलियों का आयोजन कर रही है।

