वसुंधरा राजे:‘दिल तोड़ना भी हिंसा है,राजनीति में यह अक्सर होता है’

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राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि हिंसा केवल हथियार उठाने या किसी को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी का दिल दुखाना और भरोसा तोड़ना भी हिंसा का ही रूप है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीति में अक्सर ऐसे हालात बन जाते हैं, जहां दिल टूटते और दुखाए जाते हैं।

छोटी खाटू (डीडवाना) में आयोजित आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा पर आधारित है और किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाना हिंसा माना गया है। उन्होंने कहा कि राजमाता विजया राजे सिंधिया ने उन्हें यह सीख दी थी कि जीवन में किसी का मन आहत नहीं करना चाहिए और वे उसी मार्ग पर चलने का प्रयास कर रही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के साथ अन्याय करना या किसी का अधिकार छीनना भी अधर्म है। उन्होंने भागदौड़ भरी जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि लोग समय निकालकर ईश्वर का स्मरण करें तो जीवन की कई कठिनाइयों से बचा जा सकता है।

इस अवसर पर युगप्रधान आचार्य महाश्रमण ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में नैतिकता, सद्भावना और नशामुक्ति का होना आवश्यक है। उन्होंने वसुंधरा राजे को संस्कारवान जननेता बताते हुए कहा कि वे संतों के समक्ष आसन या कुर्सी का उपयोग नहीं करतीं। समारोह के दौरान मर्यादा महोत्सव समिति की ओर से वसुंधरा राजे का सम्मान भी किया गया।