OMR शीट गड़बड़ी:गहलोत का पलटवार,बोले—जांच एजेंसियों पर 2023 तक सीमित रखने का दबाव बना रही है सरकार

Jaipur Rajasthan

राजस्थान में कर्मचारी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी ओएमआर शीट गड़बड़ी के मामले में सियासी टकराव तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि राज्य सरकार जांच एजेंसियों पर दबाव बनाकर जांच को केवल वर्ष 2023 तक सीमित रखना चाहती है।

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि मुख्यमंत्री का यह दावा “हास्यास्पद और जांच को भटकाने वाला” है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) में पकड़े गए आरोपियों ने गड़बड़ी केवल कांग्रेस शासन में ही की। गहलोत का सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति 2019 में ओएमआर शीट बदलने जैसे अपराध में शामिल था और 2026 तक उसी पद पर बना रहा, तो क्या यह मान लिया जाए कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में उसने अपराध करना बंद कर दिया।

गहलोत ने आरोप लगाया कि जांच पूरी होने से पहले ही मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल को ‘क्लीन चिट’ देने की कोशिश कर रहे हैं और विशेष अभियान समूह (SOG) पर यह दबाव डाला जा रहा है कि 2024, 2025 और 2026 की भर्तियों से जुड़ी फाइलें न खोली जाएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि जब से यह गड़बड़ी शुरू हुई, तब से लेकर 2026 तक की सभी भर्तियों की निष्पक्ष जांच हो।

पूर्व मुख्यमंत्री ने हाल ही में जोधपुर के शेरगढ़ उपखंड में सड़क पर मिले रीट भर्ती परीक्षा 2025 के एडमिट कार्ड का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि परीक्षा केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर ये दस्तावेज वहां कैसे पहुंचे। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए जांच की मांग की।

गहलोत ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी सामने आने पर सख्त कार्रवाई की थी और दोषियों के खिलाफ बिना राजनीतिक भेदभाव के कदम उठाए गए थे। उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार का उद्देश्य व्यवस्था सुधारने से ज्यादा राजनीतिक लाभ लेना है।

इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि ओएमआर शीट में गड़बड़ी का खुलासा 2019 में ही हो गया था और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साढ़े चार साल तक मामले को दबाए रखा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सवाल किया था कि उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

ओएमआर शीट गड़बड़ी को लेकर दोनों नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर जांच की निष्पक्षता और दायरे पर केंद्रित होता दिख रहा है।