ब्रिक्स कृषि बैठक:प्राकृतिक खेती से डिजिटल एग्रीकल्चर तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति,‘इंदौर घोषणा-पत्र’ जारी

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भारत के इंदौर शहर में हुई ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक एक संयुक्त घोषणा-पत्र के साथ समाप्त हुई है। “इंदौर डिक्लेरेशन” नाम के इस दस्तावेज़ में खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका, जलवायु परिवर्तन से निपटने वाली कृषि पद्धतियों और डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह बैठक सहयोग और साझा जिम्मेदारी का संदेश देती है। उनके अनुसार, ब्रिक्स देशों का समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन में भी इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।

बैठक में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई—खाद्य और पोषण सुरक्षा, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु-अनुकूल एवं पुनर्योजी खेती (Regenerative Farming), तथा कृषि क्षेत्र में तकनीक और नवाचार का विस्तार। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की चुनौतियों, बाजार तक उनकी पहुंच और आय बढ़ाने के उपायों पर विचार किया गया।

क्या है ‘इंदौर डिक्लेरेशन’?

संयुक्त घोषणा-पत्र में किसानों को केंद्र में रखकर कृषि विकास की रणनीति पर जोर दिया गया है। इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, निवेश, कृषि व्यापार, नवाचार और जलवायु-सहनीय खेती को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।

ब्रिक्स देशों ने इस घोषणा-पत्र में शामिल पहलों को लागू करने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई है।

चार नई पहलें

बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए चार नए मंचों और नेटवर्क की घोषणा की गई:

  • BRICS Network of Centres of Excellence on Agro-Ecology and Regenerative Agriculture – प्राकृतिक और पुनर्योजी खेती पर अनुसंधान तथा अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए।
  • BRICS Network on Digital Agriculture – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल कृषि समाधानों पर सहयोग बढ़ाने के लिए।
  • Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems – किसानों के बीज संबंधी अधिकारों और पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए।
  • BRICS AgriN (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) – कृषि आदानों, बीजों और आनुवंशिक संसाधनों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए।

जलवायु परिवर्तन और कृषि

बैठक में जलवायु परिवर्तन के कृषि पर प्रभाव, खाद्य हानि (Food Loss) को कम करने और सतत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि पुनर्योजी और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।

उर्वरकों की कीमतों पर क्या कहा गया?

उर्वरकों की बढ़ती वैश्विक कीमतों के सवाल पर मंत्री ने कहा कि भारत सरकार किसानों को सब्सिडी वाली दरों पर खाद उपलब्ध कराती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं।

युवा और महिलाओं की भूमिका

बैठक में कृषि क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मंत्री के अनुसार, कृषि-आधारित स्टार्टअप और नई तकनीकों के कारण युवाओं का रुझान इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, और सदस्य देशों ने इस अनुभव को साझा करने पर सहमति व्यक्त की है।

इंदौर में आयोजित यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान हुई और इसे कृषि सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।