महाराष्ट्र में मंगलवार को एनसीपी नेता छगन भुजबल ने राज्य कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने कहा, “अंत भला तो सब भला। मैंने अब तक हर जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभाया है और आगे भी निभाऊंगा।”
77 वर्षीय भुजबल को पिछले साल नवंबर में महायुति सरकार के गठन के समय मंत्री नहीं बनाया गया था, जिससे वे नाराज थे। अब उन्होंने धनंजय मुंडे की जगह ली है, जिन्होंने मार्च में स्वास्थ्य कारणों से खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। भुजबल इस मंत्रालय का पहले भी दो बार कार्यभार संभाल चुके हैं।
“क्या मैं खिलौना हूं?”
दिसंबर 2023 में मंत्री पद से वंचित रहने पर भुजबल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, “क्या मैं खिलौना हूं? जब चाहो मुझे खड़ा कर दो, जब चाहो बैठा दो?” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया क्योंकि इससे उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों में गलत संदेश जाता।
मराठा आरक्षण विरोध को बताया मंत्री पद न मिलने का कारण
भुजबल ने दावा किया था कि मराठा आरक्षण का विरोध करने के कारण उन्हें कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचार रखने का अधिकार है। मंत्री पद तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन मुझे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन्हें मंत्री पद देने के पक्ष में थे, लेकिन अंतिम निर्णय एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने नहीं लिया।
अब मंत्री बनाए जाने के साथ भुजबल की नाराजगी खत्म होती दिख रही है और उन्होंने एक बार फिर सरकार में अहम जिम्मेदारी संभाल ली है।

