जयपुर। राजस्थान विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सेंट्रल जेल पहुंच कर एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष विनोद जाखड सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद सरकार को चेताया कि वह सत्ता के मद में चूर होकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ज्यादती करने से बाज आए, हम सरकार की तानाशाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
जूली ने कहा कि सरकार के दवाब में एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के विरूद्ध में नाजायज मुकदमें लगाये गये हैं, जो अपराध इन्होंने किया ही नहीं, उन धाराओं में इन्हें बंद किया गया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस अपनी स्थापना के एक सौ वर्ष पूरे करने पर शताब्दी वर्ष मना रहा है, लेकिन उनसे यह पूछा जाए कि देश की आजादी के संघर्ष में इनका क्या योगदान रहा है।
जूली ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, इसका मतलब यह तो नहीं कि आप देश के कानून और संविधान को नहीं मानेंगे और तानाशाहीपूर्वक शासन करेंगे। आरएसएस यूनिवर्सिटी में पथ संचलन करके विद्या के मन्दिर को राजनीतिक अखाडा बनाना चाहती है, इसको लेकर हमारे कार्यकर्ताओं का विरोध था। इसी वजह से आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा हमारे कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और उन पर झूठे मुकदमें लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया। जो अपराध इन्होंने किया ही नहीं, उन धाराओं में इनके खिलाफ मुकदमें दर्ज किये गये हैं और अब तानाशाही के चलते इनकी जमानत तक नहीं होने दे रहे हैं। आज करवा चौथ का महापर्व है और सनातन की बात करने वाली सरकार ने निर्दोष युवाओं की जमानत टालने के लिये पुलिस को निर्देश देकर इनकी केस डायरी भी कोर्ट में पेश नहीं होने दी, जिससे इनकी जमानत नहीं हो सकी।
जूली ने कहा कि सरकार नाजायज रूप से हवालात में बन्द किये गये एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष और अन्य कार्यकर्ताओं के विरूद्ध एक भी आरोप सिद्ध नहीं कर सकती, क्योंकि इन्होंने कोई अपराध किया ही नहीं, बल्कि आरएसएस के बीस-बीस लोगों ने मिलकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, जिससे हमारे कार्यकर्ता एसएमएस अस्पताल में भर्ती हैं, जिन्होंने मारपीट की, उनके खिलाफ तो कोई कार्रवाई की नहीं गई और जो कांग्रेस कार्यकर्ता शान्तिपूर्वक धरना दे रहे थे, उन्हें गलत धाराओं में लाकर बन्द कर दिया और पुलिस वालों ने तो सरकार की शह पर गाडियों के शीशे तोडकर भडास निकालने का काम किया। सरकार यह बताये कि इन्होंने कौनसे राजकार्य में बाधा उत्पन्न की और कौनसी सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया। सरकार को इसका ऑडियो और वीडियो जारी करना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जूली ने कहा कि कल एसएमएस अस्पताल के एक डॉक्टर को एक लाख रूपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। वह डॉक्टर आरएसएस का स्वयंसेवक है और चिकित्सा प्रकोष्ठ का पदाधिकारी भी है, यह इनका नैतिक चरित्र और असली चेहरा है। इनका इस ओर तो ध्यान है नहीं और जो इनका विरोध करता है, या सरकार की बातों से सहमति नहीं रखता है, देशद्रोही हो गया है। डबल इंजन की सरकार होने का यह मतलब हो गया है कि अब यह लोगों को डबल तरीके से कुचलने का काम करेंगे।
जूली ने कहा कि कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब प्रदेश में किसी की हत्या नहीं हो, डकैती नहीं हो, किसी दलित पर अत्याचार नहीं हो, किसी के साथ दुष्कर्म नहीं हो। आज प्रदेश की कानून व्यवस्था जीरो है। रोजाना भ्रष्टाचारी पकडे जा रहे हैं और आम जनता सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही है, उस ओर तो सरकार का ध्यान है नहीं और यह प्रयास किया जा रहा है कि आरएसएस का कैसे महिमा मंडन किया जाए, कैसे आरएसएस की विचारधारा को आगे बढ़ाने और आरएसएस के इतिहास पर लगे काले धब्बे को उजला किया जाए।
जूली ने सरकार पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह तानाशाही है, लोकतंत्र का हनन और संविधान की हत्या है। जूली ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास की बात करने वाली सरकार ने आज देश और प्रदेश में क्या हालात पैदा कर दिये हैं। देश की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले एक दलित आईपीएस अधिकारी ने आत्महत्या कर ली, तीन दिन पहले चीफ जस्टिस ऑफ इण्डिया पर जूता फेंका जाता है। चार-पांच दिन पहले यूपी में एक दलित को सरेआम पीट-पीटकर मार दिया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से भी सवाल किया है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ इतना अपमानजनक बर्ताव हो जाए, एक दलित को सरेआम मार दिया जाए और एक प्रशासनिक अधिकारी को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पडे़ और वे एक शब्द भी नहीं बोलें। उन्हें इस पर बयान देना चाहिए। ऐसे में आम लोगों का जीवन दुश्वार हो गया है।
जूली ने कहा कि पिछले 11 वर्षों से देश में धर्म व जाति के नाम पर जिस प्रकार का वातावरण पैदा किया जा रहा है, उसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि आपको देश के संविधान ने प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचाया है, आप इसे कुचलने का नहीं, इसे बचाने का काम करें। देश का हर नागरिक इस देश का वासी है, उसके भी अधिकार हैं, उन अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। जिन लोगों ने आईपीएस अधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव किया, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

