जयपुर, 28 सितम्बर। देश में हो रही वोट चोरी और निर्वाचन आयोग में हुई अनियमितताओं तथा राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा द्वारा की गई बेईमानी के विरोध में आज राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस द्वारा जयपुर के शहीद स्मारक पर विशाल धरना-प्रदर्शन कर राज्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के घेराव के लिये हजारों कार्यकर्ताओं ने विशाल मार्च निकालकर गिरफ्तारी दी। विरोध-प्रदर्शन में एआईसीसी के राजस्थान प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, एआईसीसी सहसचिव पूनम पासवान एवं रित्विक मकवाना, कांग्रेस विधायक, सांसद, विधायक प्रत्याशी, सांसद प्रत्याशी, जिलाध्यक्ष, पीसीसी पदाधिकारी सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुये।
इस अवसर पर धरने को सम्बोधित करते हुये राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी देश में लोकतंत्र बचाने के लिये जन आन्दोलन कर रही है क्योंकि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान में जो नागरिकों वोट का अधिकार दिया है उससे सरकारें बनती है और देश के विकास के लिये कार्य करती हैं। संविधान ने बिना किसी भेदभाव के सभी को एक वोट का अधिकार दिया है, चाहे गरीब हो, दलित हो, पिछड़ा हो अथवा बड़े से बड़ा उद्योगपति हो, वोट का अधिकार सबके पास समान है। आज देश में इस वोट के अधिकार को समाप्त करने के लिये षडय़ंत्र किया जा रहा है, तानाशाही और दादागिरी से काम करते हुये केन्द्र सरकार ने अघोषित आपातकाल लगा दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गॉंधी और राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने स्पष्ट रूप से कहा था कि नरेन्द्र मोदी देश में तीसरी बार प्रधानमंत्री वोट चोरी करके बने हैं, जनता से कोई जनमत इन्हें नहीं मिला है। इसका प्रमाण यह है कि चुनाव के बाद भाजपा ने कोई पार्लियामेंट की बैठक नहीं बुलाई, क्योंकि सभी जानते थे कि उसमें यह मुद्दा उठता कि नरेन्द्र मोदी स्वयं अपने संसदीय क्षेत्र से वोट चोरी से चुनाव जीतकर आये, जनता ने तो नकार दिया था। राहुल गॉंधी ने प्रेस कान्फें्रस करके पूरे देश को सबूतों के साथ जानकारी दी थी कि किस प्रकार वोट चोरी की गई। बिहार चुनाव में एसआईआर के माध्यम से लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित किया गया, उनके नाम काट दिये गये, पश्चिम बंगाल के चुनावों में भी वोट चोरी करने के लिये चुनाव आयोग ने केन्द्रीयकृत सिस्टम कर दिया था और काफी लोगों को मताधिकार से वंचित करने का कार्य किया गया। जबसे ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने वह गृहमंत्री अमित शाह के ईशारे पर काम कर रहे हैं, उन्होंने देश मेें चुनावों को प्रभावित करने का काम किया है, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को कलंकित करने का काम ज्ञानेश कुमार ने किया है। चुनाव आयोग में जो अनियमितता हुई उसमें तीन में से प्रथम यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों की जानकारी के बगैर फार्म नं. 6 जिससे नये मतदाताओं को जोड़ा जाता है, में परिवर्तन करने का कार्य किया गया। परिवर्तन यह हुआ है कि यदि 2002 की वोटर लिस्ट में परिवार का तथा परिवार के सदस्य का नाम है तो ही वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाया जा सकेगा। फार्म नं. 6 के लिये नियम देश की संसद बना सकती है, इसमें परिवर्तन करने अथवा नियम बनाने का अधिकार चुनाव आयोग को नहीं होता है। इस परिवर्तन से हर राज्य में, हर विधानसभा क्षेत्र में हजारों-लाखों मतदाताओं का मत देने के अधिकार से वंचित रखा गया। भाजपा और उनके नेताओं द्वारा यह कहा गया कि जिसका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में नहीं उसे मत देने का अधिकार नहीं है और वह भारत का नागरिक नहीं है। इस कारण लाखों लोगों को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। फार्म नं. 6 में किया गया बदलाव गैर कानूनी और असंवैधानिक था, केवल लोगों के वोट काटने और लोकतंत्र को लूटने के लिये ऐसा किया गया है, यह बेईमानी नहीं आपराधिक कृत्य है। दूसरा मुद्दा यह है कि वोट जोडऩे और कटाने का काम हर विधानसभा के एसडीएम का होता है लेकिन इस बार निर्वाचन आयोग ने ईआरओ नेट को केन्द्रीयकृत कर दिया, बिना चुनाव आयुक्तों की सहमति के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपनी टीम बैठाकर मनमर्जी से वोट काटे गये और वोट जोड़े गये। नेता विपक्ष राहुल गॉंधी ने पूर्व में भी यह मुद्दा उठाया था कि सवेरे चार बजे वोट जुड़ रहे हैं और कट भी रहे हैं, यह कैसे सम्भव हो सकता है, क्योंकि यह अधिकार एसडीएम के पास होता है, वह चार बजे उठकर वोट जोडऩे और घटाने का काम नहीं कर सकता है, यह काम कार्यालय समय में ही एसडीएम द्वारा किया जा सकता है। तीसरा मुद्दा यह है कि पश्चिम बंगाल में 32 लाख वोट काटने का कार्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया गया और जब 95 प्रतिशत मतदाता सही निकले और उनके नाम फिर से जुड़ गये तो उसके खिलाफ निर्वाचन आयोग ने अपील कर दी। मतदान के अधिकार पर आपत्ति आ गई, उसका निस्तारण हो गया, तो चुनाव आयोग को क्या अधिकार है कि मतदाता के अधिकार को छीने। जब राहुल गॉंधी ने वोट चोरी का मुद्दा उठाया, मताधिकार छीनने का विरोध किया तो अब कहा जा रहा है कि जिनके नाम कटे हैं उनके घर-घर अधिकारी जाकर नाम जोडऩे का कार्य करेंगे। देश में बिहार का चुनाव हुआ, हरियाणा का चुनाव हुआ, लोकसभा के चुनाव हुये, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के चुनाव थे तब तो यह वोट जोड़े नहीं गये और अब जब जनता जागरूक हो गई तो कांग्रेस के आन्दोलन से घबराकर वापिस वोट जोडऩे की घोषणा कर रहे हैं। राहुल गॉंधी और मल्लिकार्जुन खडग़े ने स्पष्ट कह दिया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की चोरी पकड़ी गई है इसलिये इस्तीफा भी देना होगा और जेल भी जाना होगा। इसके पश्चात् मीडिया में भी चुनाव आयोग की अनियमितताओं का खुलासा हो गया, दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने अपना विरोध दर्ज कराने की चिट्ठी भी लिखकर दी है, क्योंकि सारी अनियमितता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर की है। आज का यह विरोध प्रदर्शन वोट चोरी के खिलाफ राहुल गॉंधी के आह्वान पर चलाये जा रहे अभियान की शुरूआत है, अब कांग्रेस के कार्यकर्ता गॉंव-गॉंव, ढाणी-ढाणी जाकर एसआईआर में की गई गड़बडिय़ों और अनियमितताओं को उजागर करेंगे। एसआईआर में राजस्थान में कांग्रेस के विरोध कारण जब गड़बड़ी नहीं कर सके तो राजस्थान में निकाय व पंचायत चुनाव पुरानी वोटर लिस्ट से करवाये जा रहे हैं। इतनी बड़ी अनियमितताओं और वोट चारी के बाद भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के चेहरे पर शिकन नहीं है, इसलिये कड़े से कड़ा दण्ड इस अपराध के लिये उसे मिलना चाहिये।
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में भाजपा ने निकाय चुनावों में जो ताण्डव किया वो सभी ने देखा है। भाजपा के चार नेता केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा राजस्थान भेजे गये जिन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अलग-थलग कर मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठकर प्रदेश के आईजी, डीआईजी, कलेक्टर, एसपी को निर्देशित किया कि कांग्रेस के चुने हुये पार्षदों के कैम्प में घुसकर कांग्रेस तथा कांग्रेस समर्थित पार्षदों को डरा-धमकाकर व लालच देकर भाजपा के समर्थन में लायें। इससे ज्यादा शर्मनाक बात नहीं हो सकती कि दो से तीन दिन में 152 से ज्यादा अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई और पुलिस ने मनमानी की। देश के प्रधानमंत्री राजस्थान में प्रचण्ड बहुमत बता रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि राजस्थान में लोकसभा चुनाव में जहॉं चार लाख वोटों से भाजपा प्रत्याशी चुनाव जीता था, वहॉं निकाय चुनाव में भाजपा 16 हजार वोटों से कांग्रेस से पीछे रही है। जयपुर, जोधपुर में भी कांग्रेस को भाजपा से अधिक मत मिले हैं। भरतपुर में कांग्रेस के समर्थन से विजयी पार्षद जो बोर्ड चेयरमेन के लिये नामांकन कर चुनाव लड़ रहे थे उनके प्रतिष्ठानों पर सरकारी एजेंसियों ने डराने के लिये कार्यवाही की और नामांकन वापस लेने के लिये मजबूर किया, यह चुनाव की विजय नहीं है, जनमत लूटने का कार्य होता है। संवैधानिक पद पर बैठा हुआ व्यक्ति जब इस प्रकार शक्तियों का दुरूपयोग करता है, पैसे की डीलिंग करता है तो यह सबके लिये शर्म की बात है। सभी नेताओं ने नगर निकाय चुनावों में पूरी शक्ति के साथ जबरदस्त लड़ाई लड़ी है और अब पंचायत चुनाव में भाजपा को मुॅंहतोड़ जवाब दिया जायेगा। जहॉं भी भाजपा नेता और पुलिस ज्यादती करें, वहॉं पूरी ताकत के साथ उसका विरोध किया जाये, चाहे जितने मुकद्में लग जाये, कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता डरकर पीछे नहीं हटे। देश के महापुरूष आजादी की लड़ाई में अगर इस बात से डर जाते कि मुकद्मा लग जायेगा तो यह देश आजाद नहीं होता। पं. जवाहरलाल नेहरू दस साल तक जेल में रहे, महात्मा गॉंधी ने वकालत छोडक़र देश की आजादी की लड़ाई लड़ी। आज वक्त है कि सभी कांग्रेसजन मिलकर लोकतंत्र बचाने की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़े अन्यथा ना तो देश में लोकतंत्र बचेगा और ना ही संविधान बचेगा, मतदान का अधिकार भी छीन लिया जायेगा। यदि संविधान और मतदान का अधिकार ही नहीं रहा तो सरकार अर्थहीन हो जायेगी, मर्जी आयेगी जहॉं पर सरकार बना लेंगे और जनता का शोषण करेंगे। उन्होंने कहा कि भले ही सरकार जेल में डाल दे लेकिन यह संघर्ष अब रूकेगा नहीं, लोकतंत्र बचाने की लड़ाई कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी और अभी पंचायत चुनाव जीतेंगे, 2028 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी तथा 2029 में राहुल गॉंधी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।
इस अवसर धरने को सम्बोधित करते हुये राजस्थान प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने कहा कि सरकार को अब जवाब देना चाहिये, लोकतंत्र का अपराधी ज्ञानेश कुमार कब गिरफ्तार होगा। राजस्थान निकाय चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया है, भाजपा सरकार में रहते हुये हारी है, यह स्पष्ट संकेत है कि 2028 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी भारी बहुमत के साथ सरकार बनायेगी।
धरने को सम्बोधित करते हुये राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि केन्द्र सरकार को जवाब देना चाहिये कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति पहले प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इण्डिया का पैनल करता था, इसे कानूनन बदलकर मुख्य न्यायाधीश के जगह केन्द्रीय मंत्री जोडऩे का कार्य क्यों किया गया। सरकार को यह भी जवाब देना चाहिये कि केन्द्र सरकार ने ऐसा कानून क्यों बनाया है कि चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई आपराधिक और कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती है, यह पूरी साजिश इसलिये की थी कि चुनाव आयोग भाजपा नेताओं के ईशारे पर कार्य कर रहा था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाना चाहते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने धरने को सम्बोधित करते हुये कहा कि देश में लोकतंत्र पर प्रहार हो रहा है, जब न्यायपालिका चेती तब तक बिहार और बंगाल में चुनाव हो चुके थे, ऐसा पहली बार सुना है कि 27 लाख वोट काट दिये गये और न्यायपालिका कहे कि कोई बात नहीं अगली बार वोट दे देना, ऐसा मजाक कभी नहीं सुना। मतदान अधिकार है, उससे वंचित किया जाना गलत है, जो वोट काटे गये उनमें से 90 प्रतिशत वोट सही निकले, यह उदाहरण है कि देश में क्या हो रहा है, आज देश के सामने बड़ी चुनौती है। आज आमजनता को यह समझाना पड़ेगा कि एसआईआर क्या है और इससे जनता को क्या नुकसान हो रहा है। यह लड़ाई कांग्रेस पार्टी हर मतदाता के लिये लड़ रही है। एसआईआर ने लोग जो 15-15, 20-20 साल से वोट दे रहे हैं उनके मताधिकार पर प्रश्र चिन्ह लगा दिया, बड़े-बड़े नेताओं के घर नोटिस भेज दिये, आप मतदाता हैं या नहीं, आप साबित करें, यह इतना बड़ा काण्ड है जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की सहमति के बिना सम्भव नहीं है।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं मीडिया चेयरपर्सन स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि कल दिनांक 29 सितम्बर, 2026 को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर देश में हो रही वोट चोरी और चुनाव आयोग की अनियमितताओं तथा प्रदेश में नगर निकाय चुनावों में भाजपा सरकार की बेईमानी के विरोध में जिला कलेक्ट्रेट के बाहर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाकर विरोध-प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद हटाने, उसकी गिरफ्तारी तथा इनके कार्यकाल में किये गये निर्णयों के समीक्षा की मांग की जायेगी।