राजस्थान में हर 10 किलोमीटर पर स्वास्थ्य सुविधा देने की तैयारी, 600 नए सब-सेंटर होंगे स्थापित

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जयपुर, 28 सितम्बर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सोमवार को स्वास्थ्य भवन में सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन, दवा एवं जांच सुविधाओं सहित मौसमी बीमारियों की स्थिति की समीक्षा की गई।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को उनके घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। इसी दिशा में प्रत्येक 10 किलोमीटर पर सब-सेन्टर की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के सहयोग से नए सब-सेन्टर्स स्थापित किए जाएँगे ।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विभाग के विभिन्न संवर्गों में 50 हजार पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं। अब यह सुनिश्चित किया जाए कि उपलब्ध मानव संसाधन का उपयोग जरूरत वाले क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से हो।

खींवसर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए मानव संसाधन का बेहतर प्रबंधन किया जाए। विशेष रूप से ट्रोमा सेंटर, प्रसव सुविधा वाले स्वास्थ्य केन्द्रों और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों तथा प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग केवल निर्धारित पदों के आधार पर नहीं, बल्कि वहां की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। इसके लिए भौगोलिक स्थिति, मरीजों का भार, उपलब्ध सुविधाओं और स्थानीय जरूरतों का अध्ययन कर कार्ययोजना तैयार की जाए।

चिकित्सा संस्थानों के भवनों की सुरक्षा को लेकर भी खीवसर ने अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भवनों की सुरक्षा के लिए संस्था प्रभारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी और इस संबंध में परिपत्र जारी किया जाएगा।

उन्होंने तीन माह में सभी चिकित्सा संस्थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए। निदेशक जनस्वास्थ्य को इसकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरयूएचएस द्वारा 1699 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती पूरी कर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। वहीं 600 चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर 13 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। इन पदों के लिए दिसंबर माह में परीक्षा आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि विभिन्न कैडर में राजकीय स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध सरप्लस मानव संसाधन, चिकित्सा उपकरण और दवाइयों का आवश्यकता वाले स्वास्थ्य केन्द्रों में बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि जिन स्वास्थ्य केन्द्रों के नवीन भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, वहां भवन आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जाएंगी।

श्रीमती राठौड़ ने कहा कि मौसमी बीमारियों को देखते हुए सभी जिलों में आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, जांच सुविधाओं तथा बचाव एवं रोकथाम गतिविधियों की लगातार समीक्षा की जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य केन्द्र निर्धारित समय पर खुलें तथा चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्य कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। साथ ही अक्टूबर माह में प्रसव वाली उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की वन-टू-वन मॉनिटरिंग की जाए।

उन्होंने अधिकारियों को ऑनलाइन रिपोर्टिंग पोर्टल पर सूचनाएं समय पर अपडेट करने और विभागीय गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान एवं एचपीवी टीकाकरण में भी गति लाने को कहा।

बैठक में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।